'सत्यमेव जयति नानृतम्'

दिनांक 18 अगस्त से मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी तपस्या के लिए प्रस्तुत

दिनांक 18 अगस्त 2021 से मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी पुनः तपस्या के लिए प्रस्तुत हैं.

अभी अभी 3 दिन पूर्व ही हमने आज़ादी की 75 विन सालगिरह जोरशोर से मनाई | ये आज़ादी हमने आज से 75 वर्ष पूर्व अंग्रेजो से लड़ाई लड़ कर हासिल की थी| स्वाधीनता संग्राम जो कि लगभग 90 वर्ष चला, और हज़ारों लाखों लोग इस आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए| कुछ गुमनाम और कुछ प्रसिद्ध योद्धाओं का हम स्मरण करते हुए उनको सम्मान सहित श्रद्धांजलि देते हैं|

इन 75 वर्षों में देश ने हर ओर प्रगति की| आर्थिक हो या वैज्ञानिक| परन्तु इस विकास की दौड़ में पर्यावरण को भूलते चले गए| विकास का सही मतलब भूल कर पश्चिमी देशों को देख कर उन्हें ही अनुकरण करने को विकास मानने लगे|

विकास माने तो आर्थिक विकास| किस तरह से ज्यादा से ज्यादा कमाई की जाए इसी में बुद्धिजीवी वर्ग का दिमाग लगा रहा|

उत्तराखण्ड प्रदेश जो कि समृद्ध सम्पदा वाला प्रदेश है, अपनी मूल प्रवृत्ति को भूल कर विकास रूपी मायाजाल में फंस कर रह गया|

उत्तराखण्ड से निकलने वाली महिमामंडित नदी गंगा प्रदेश की एकमात्र शान है, जिसके कारण यहाँ पूरे देश ही नहीं बल्कि विश्व से आने वालों का तांता लगा रहता है|चाहे बच्चे का जन्म, मुंडन हो या मृत्युपरांत अस्थि विसर्जन सब गंगा किनारे ही होता है | पूरे भूमंडल गंगा एकमात्र ऐसी नदी है जिसे पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या हुई और अब रक्षा के लिए भी तपस्या ही हो रही है|

गंगा जी को अब दैवीय नदी न मानकर मात्र एक कमाई का साधन माना जा रहा है| गंगा की पवित्रता, पुण्यता को पीछे रख सिर्फ अर्थ को सब कुछ मानकर गंगा जी का भीषण शोषण किया जा रहा है और आम आदमी किंकर्तव्यविमूढ़ बना हुआ है| आस्था और अर्थ, सत्य और मिथ्या के बीच इस संग्राम में अर्थ की विजय होती दिख रही है| किन्तु सत्य कभी नहीं छुप पाया | सत्य की ही अंत में विजय होती है|

मातृसदन, हरिद्वार दो दशकों से अधिक पर्यावरण प्रदूषण और भ्रष्टाचार के विरोध में संघर्षरत है| महात्मा गाँधी जी द्वारा दिखाई सत्याग्रह की राह पर चलते हुए अब तक 66 बार अनशन लिया है मातृसदन के संतों ने| स्वामी निगमानंद एवं स्वामी सानंद जी ने अपने जीवन की बाज़ी लगा दी|साध्वी पद्मावती भी मौत से जंग लड़कर आई है और अभी तक सामान्य अवस्था नहीं प्राप्त कर पाई हैं|
स्वामी निगमानंद और स्वामी सानंद जी की मौत/हत्या की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है, वर्ष 2011 में स्वामी निगमानंद और 2018 में स्वामी सानंद जी की एम्स अस्पताल में अचानक मृत्यु होने के राज का अभी तक सरकार पता नहीं लगा पाई|

न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं हुआ, सरकार द्वारा राज्य सभा में आश्वासन दिए जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई|
साध्वी पद्मावती के साथ तपस्या के दौरान वीभत्स व्यवहार हुआ उसकी सुनवाई अभी तक नहीं हुई|
भ्रष्टाचार का ये मंजर है कि निरपराध विद्वानों को बिना कोई कारण बताये जेल भेजा जा रहा है| डॉ निरंजन मिश्र संस्कृत के प्रकांड विद्वान् जिनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों पर उन्हें साहित्य अकादमी और कालिदास सम्मान पुरस्कार से सुशोभित किया गया आज पिछले एक माह से बिना अपराध, बिना वारंट के जेल में हैं|

इन्ही कारणों से ब्रहमचारी आत्मबोधानंद जी पुनः तपस्या पर हैं|

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