'सत्यमेव जयति नानृतम्'

19 सितम्बर 2021 को हुई गंगा गोष्ठी

दिनांक 19 सितम्बर २०२१

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी के तपस्या के 33वें दिवस पर मातृ सदन में सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें देशभर से बुद्विजीवी और पर्यावरणविद्ध शामिल हुए। 100 से भी ज्यादा लोगों ने मातृ सदन आकर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी के सत्याग्रह को अपना समर्थन प्रदान किया।
अनशन को लेकर सरकार की पड़पीड़नशीलता के खिलाफ खेद प्रकट किया और साथ ही अनशन को देशभर से समर्थन दिलवाने का संकल्प भी लिया।
मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द जी महाराज ने कहा कि सरकार की वादा खिलाफी के मध्यनज़र ही मातृ सदन को लगातार आंदोलन करने पड़ते रहे है। इस बार के अनशन में कोई नई मांग नहीं है। मातृ सदन से जो सरकार ने लिखित में वादें किए है सरकार उन्हें अक्षरक्षः पालन करे। स्वामी निगमानंद सरस्वती और स्वामी सानंद जी की मृत्यु के लिए सरकर निश्चित रुप से जिम्मेदार है। साध्वी पद्मावती के साथ हुई बर्बरता पर भी लगातार मौन साधे हुए है। इन सभी मामलों पर तत्काल जाँच बैठे । तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा।

मुख्य अतिथियों में:
मैगसेसे अवार्ड विनर डा. संदीप पाण्डेय जी ने याद दिलाया कि स्वामी निगमानंद सरस्वती की मृत्यु अस्पताल में हुई, सानंद जी को भी उनकी इच्छा के विपरीत स्वस्थ अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया और अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गई । साध्वी पद्मावती को प्रशासन ने उठाया और उनके साथ ऐसा बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया। ऐसा क्या है कि जिनको भी पुलिस उठाकर ले जाती है उनकी मृत्यु हो जाती है। साधु गंगा के लिए अपनी जान की बाजी लगा रहे है और किसी को समझ नहीं आता कि सरकार क्यों नहीं चेत रही और आम आदमी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा।
युवा पर्यावरणविद कुमारी रिद्धिमा पाण्डेय ने कहा कि हर युवा अगर अपने स्तर पर जिम्मेदारी उठाए तभी पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है। उन्होंनें कहा कि हरिद्वार में इतने आश्रम है सबका कचरा गंगा में ही फेंका जा रहा है। गंगा विश्व की दस सबसे ज्यादा प्रदूषित नदियों में से एक है। साथ ही साथ समुद्र में सबसे ज्यादा प्लास्टिक पहुँचाने में भी गंगा नदी दुनिया की दस सबसे बड़ी नदियों में से एक है। उन्होंने कहा कि वे मातृ सदन के सत्याग्रह को अन्तराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना चाहती हैं।

विद्याविद् डा. मानसी बाल भार्गव ने कहा कि गंगा बहुत भाग्यशाली नदी है। देश भर की नदियों के पास भी उतना बजट नहीं हैं जितना अकेले गंगा के पास है। परन्तु गंगा की जो दुर्दशा हो रही हैं वही बाकी नदियों के साथ भी हो रही है। उन्होंने हमारे शरीर और जल के बीच की समरुपता के बारे में बताया। नाली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के नाड़ी शब्द से हुई है। पानी से बने इस शरीर में जिस प्रकार प्राणों का संचार होता है ठीक उसी प्रकार छोटी छोटी जल की इकाइयों को जैसे नाली तलाब इत्यादि को भी ठीक से संभाल कर रखने से हमारी नदियों की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गंगा को बचाने के लिए महिला शक्ति को भी अपनी आवाज़ उठानी होगी क्योंकि इतिहास में जो भी पर्यावरण आंदोलन हुए हैं उनमें महिलाओं का बहुत बड़ा हाथ रहा है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने फोन से अपना समर्थन दिया। उन्होंनें कहा कि गंगा की रक्षा के लिए लोगों को हठ करने की आवश्यकता है और उन्होंनें कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी का जीवन बेहद मूल्यवान है। साथ ही कहा कि गंगा और बाकी नदियों को बचाने का भी हमें सतत प्रयास करना चाहिए।
खुदाई खिदमतगार के श्री फैसल खां ने कहा कि जबतक मन में प्रेम नहीं होगा तब तक अहिंसा भी नहीं होगी। अगर दूसरे के प्रति मेरे मन में सद्भावना नहीं होगी तब वह मेरा धर्म नहीं होगा दिखावा होगा। उन्होने रामचरित मानस का उल्लेख करते हुए कहा कि मिले ना रघुपति बिन अनुरागा, किए जोग तप ज्ञान विरागा।
साध्वी पद्मावती ने कहा कि गंगा नहीं तो भारतवर्ष नहीं, माँ गंगा को बचाना है बेहद जरुरी।
हरिद्वार के वरिष्ठ चिकित्सक डा. विजय वर्मा ने कहा कि किसी भी घटना को अलग से देखना अपनी ज़िम्मेदारी से भागना है। प्रकृति और मानव सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और गंगा की अविरलता में बाधा होने से हमारी जीवन शक्ति में भी बाधा आती है।
भोपाल सिंह चौधरी ने कहा सरकार तक आवाज़ पहुँचाने के लिए संगठन की ज़रुरत है और वह अपने संगठन से इस आवाज़ को सरकार तक पहुँचाने में मदद करेंगें।
उत्तराखण्ड महिला मंच से ऊषा भट्ट और निर्मला भिष्ट ने आकर समर्थन किया। उन्होंनें कहा कि एक तो पहाड़ में बांध बनने ही नहीं चाहिए, और बांध बनाने के बाद सरकार जो आम नागरिकों से साथ वादा खिलाफी करती है वह उनके साथ धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को अभियान में बदलना होगा।
गंगासागर से गंगोत्री तक मोटरसाइकिल पर यात्रा कर रहे सुजोय मण्डल और रबी कांत ने भी आ कर समर्थन दिया।
सुंदरबन, बंगाल से नदी बचाओ अभियान के कल्लौल रोय ने कहा की इगो को इको से बदल दीजिए।
सत्याग्रह को आगे बढ़ाने के लिए हरिद्वार लेडीज़ क्लब की अंजू मिश्रा, कांगेस लीडर संजीव चैधरी, रामेश्वर गौड़ आदि ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.