'सत्यमेव जयति नानृतम्'

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ब्र आत्मबोधानंद के जलत्याग पर श्री गुरुदेव का वक्तव्य

ब्र आत्मबोधानंद जी के जल त्याग की सूचना देने पर भी सरकार ने अबतक कोई वार्ता नहीं की है.

खनन की संसुति  करती आधी अधूरी और गलत रिपोर्ट ज़ारी करने पर आई टी कानपूर के डायरेक्टर को १०० पॉइंट का पत्र प्रेषित किआ गया है .

 

ब्र आत्मबोधानंद जी का आज 8 मार्च से जल त्याग

मातृ सदन द्वारा पिछले २० वर्षों में लगभग 65 सत्याग्रह किये जा चुके हैं| चूँकि मातृ सदन एक ऐसी अध्यात्मिक संस्था है जो कि पर्यावरण हित में ही कार्य करती है| इन की कार्य प्रणाली महात्मा गाँधी से प्रेरित सत्याग्रह के आधार पर है|
गत दो दशकों से गंगा जी को खनन एवं बांधों की विभीषिका से अवगत कराने के साथ साथ इस पर रोक लगाने के लिए अनेक संघर्ष किये|
कुछ समय पूर्व 22 जून 2018 से अनशनरत सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के प्रथम सदस्य सचिव, आई आई टी कानपुर के प्रोफेसर डॉ जी डी अग्रवाल / स्वामी सानंद जी को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा जबर्दस्ती उठा कर अस्पताल में भर्ती कर दिया और 24 घंटे के अन्दर ही उनकी मृत्यु का ऐलान कर दिया| इसी तरह वर्ष 2011 में स्वामी निगमानंद को भी अस्पताल में भर्ती करके उनकी मौत का ऐलान किया था|
दोनों बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, जिसने सत्याग्रह के महत्त्व को कभी नहीं समझा| हिंसा के बल पर दो पर्यावरण विद्यों को जीवन से हाथ धोना पड़ा| किन्तु मातृ सदन कभी पीछे हटने वाला नहीं है| स्वामी सानंद जी की मृत्यु के बाद ब्रहमचारी आत्मबोधानंद ने तपस्या शुरू की जो की 6 महीने से ज्यादा 194 दिन तक चली जब नमामि गंगे के डायरेक्टर द्वारा उनको लिखित आश्वासन दिया गया कि उनको मांग पूरी होगी और इस मामले को माननीय प्रधानमंत्री को भी संज्ञानित किया गया है| कार्यवाही करने के लिए 7 दिन का समय माँगा| किन्तु जब 7 दिन 7 महीने में बदल गए और सरकार चुपचाप बैठी रही तो मातृ सदन की ब्रह्मचारिणी पद्मावती ने सत्याग्रह करने की ठानी और 15 दिसम्बर 2019 से सत्याग्रह शुरू किया| सिर्फ नींबू, शहद और जल पर गुजारा किया, अन्न त्याग किया| उनके साथ जो दुर्व्यवहार हुआ वो सबको ज्ञात ही है| किस प्रकार नारी संत का अपमान उन्हें गर्भवती बता कर किया गया, ये बेहद शर्मनाक है| इससे सरकार की कुटिल नीयत का पता चलता है|
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने गंगा को अविरल बनाने के लिए निरंतर प्रयास किया. उनकी मांग थी कि गंगा के आस-पास बन रहे हाइड्रॉइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को बंद किया जाए और गंगा संरक्षण प्रबंधन अधिनियम को लागू किया जाए.
मुख्य रूप से उनकी चार मांगे थीं.
पहली, गंगा-महासभा द्वारा प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरन्त संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराया जाए. इस ड्राफ्ट के प्रस्तावकों में स्वामी सानंद खुद भी थे. यदि ऐसा न हो सके तो इस ड्राफ्ट के अध्याय–1 (धारा 1 से धारा 9) को राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा तुरंत लागू और प्रभावी बनाया जाए.
दूसरी मांग, अलकनन्दा, धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडर तथा मंदाकिनी पर प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना निरस्त की जाए.
गंगा की सहायक नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं को निरस्त किया जाए. हरिद्वार में खदान पर पूर्ण रोक लागू हो, यह तीसरी मांग थी.
चौथी मांग ‘गंगा भक्त परिषद‘ का गठन है.
बड़े ही विस्मय और खेद की बात है कि सरकार अपने लिखित आदेशों से पलट गयी| जल शक्ति मंत्रालय ने रायवाला से भोगपुर तक खनन पर बैन लगा दिया किन्तु बाद में अपने ही फैसलों को दरकिनार करते हुए दोबारा खनन शुरू कर दिया|
इसी मुद्दे को राज्य सभा में उठाया गया तो जवाब मिला कि मातृसदन के संपर्क और उनसे विचार करके ही कार्य होगा, किन्तु हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ|

वर्तमान में भी ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी की इन्ही मांगो को लेकर दिनांक 23 फरवरी 2021 से सत्याग्रह पर हैं|
7 दिन बीत जाने के बाद भी उनकी नहीं सुनी गयी तो उन्होंने दिनांक 8 मार्च 2021 से उग्र तपस्या का ऐलान कर दिया है, जिसके अनुसार वे 8 मार्च से जल का भी त्याग करेंगे|
ऐसी विकट परिस्थिति में क्या सरकार उनकी बात सुनेगी?
गंगा किनारे अनेको शहर बसे हुए हैं खासकर हरिद्वार जहाँ पर प्रत्येक 12 वर्ष में महाकुम्भ होता है, गंगा से लाखों परिवारों की रोजी रोटी चलती है वे भी इस बात से अनभिज्ञ हैं कि जब गंगा लुप्त हो जाएगी तो उनका जीवन कैसे चलेगा|

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 – 17:02

Author

हिमांशु भट्ट

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिमत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे। शेष अन्य सदस्यों में मातृ सदन का एक प्रतिनिधि तथा दो अन्य का निर्धारण वह टीम करेगी। इस टीम को सरकार से संवाद करने का दायित्व भी सुपुर्द किया गया है।

 

इस दौरान दक्षिण भारतीय फिल्मो के सुप्रसिद्ध अभिनेता पवन कल्याण ने स्वामी सानंद की अपूरणीय क्षति से उनके हृदय में हुई वेदना को सार्वजनिक करते हुए कहा कि जब उन्होंने सुना था कि स्वामी सानंद नहीं रहे तो उन्हें बहुत गहरा आघात हुआ और अपनी जिम्मेदारी का बोध हुआ। उन्होंने कहा कि स्वामी के जाते ही मुझे ऐसा लगा कि स्वामी जी के निधन का दोषी हर भारतीय है, क्योंकि मां गंगा सभी की है और गंगा को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है। पवन कल्याण ने कहा कि हमने 2014 में मोदी सरकार का समर्थन किया था ताकि गंगा का पुनर्जीवन सम्भव हो सके, लेकिन सौ से ज्यादा दिनों तक अनशन के बाद स्वामी सानंद जी का चले  जाना अत्यन्त दुखदायक रहा। इससे हमने महसूस किया कि यदि सरकार गंगा के प्रति संवेदनशील होती तो ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि वे स्वामी सानंद के बलिदान के समय मातृसदन नहीं आ पाए थे जिसका उन्हें बहुत दुख है, लेकिन आज एक साल बाद वे यहाँ उपस्थित हैं। यहाँ बहुत से आश्रम हैं लेकिन मातृ सदन सबसे विशेष है जिसके सन्यासी गंगाजी के लिए खड़ें हैं।

पवन कल्याण ने कहा कि गंगा को भारतवर्ष में माँ का दर्जा प्राप्त है और गंगा नदी का सम्मान विश्वव्यापी है। गंगा की रक्षा के लिए हम गंगा के इस आंदोलन से युवाओं को जोड़ेंगे। पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने कहा कि हम दायित्व का निर्वाह पूरे मनोयोग से करेंगे तथा गंगा को अविरल बनाने के लिए सरकार को बाध्य करेंगे.। जल पुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कहा कि गंगा के पाँच सरोकार अध्यात्म, संस्कृति, सत्यनिष्ठा, समाज तथा युवा को बनाकर आगे के आन्दोलन चलाए जाएँगे। अध्यक्षीय वक्तव्य में स्वामी शिवानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन की कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए मातृ शक्ति आगे आ रही है और 23 वर्षीय मातृ सदन की साध्वी ब्रह्मचारिणी पद्मावती अपने प्राणों के उत्सर्ग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि वे अभी भी चाहते हूँ कि सरकार को सदबुद्धि हो लेकिन सरकार को सदबुद्धि तभी होगी जब जनमानस जागरुक होगा। बसवराज पाटिल ने कहा कि बड़े मन से बड़ा कार्य होता है तथा आन्दोलन के लिए सही समय का चुनाव करना यथार्थ रूप से सबसे अधिक आवश्यक है। साथ ही सभा की समाप्ति से पहले सभी ने स्वामी सानंद जी के संकल्प को पूरा करने के लिए अपना पूरा प्रयास करते रहने का संकल्प लिया।