'सत्यमेव जयति नानृतम्'

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श्री गुरुदेव की तपस्या हुई उग्र

मातृ सदन की तपस्या पर सरकार की चुप्पी कायम है। गंगा पर बन रहे बांध परियोजनाओं एवं खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार की तरफ से अभी तक कोई जवाब नही आया है।

दिनांक 27 मार्च से से श्री गुरुदेव जी अपनी तपस्या को उग्र करते हुए मात्र दो ग्लास जल लेना प्रारंभ कर दिया है।

प्रदेश व्यापार मण्डल का समर्थन

आज प्रदेश व्यापार मण्डल के एक प्रतिनिधी मण्डल ने प्रदेश अध्यक्ष संजीव चौधरी के नेतृत्व मे माँ गंगा के लिए अपने प्राणो का बलिदान करने की घोषणा करने वाले संत स्वामी शिवानन्द जी व अनशन कर रहे स्वामी आत्मबोधानंद जी को अपना समर्थन दिया ।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष संजीव चौधरी ने कहा की स्वामी शिवानन्द जी का जीवन देश व धर्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण है इस लिए हम स्वामी जी से माँग करते है की वह अपने प्राणो के त्याग का निर्णय वापस ले ले,समाज को उनकी बहुत ज़रूरत है और राज्य व केन्द्र सरकार से माँग करते है की तत्काल अपनी सत्ता की हथधर्मिता को छोड़ कर अनशन कर रहे संतो से वार्ता करे और माँ गंगा रक्षा के लिए ठोस क़ानून बना कर उनको सख़्ती से लागु करे, चौधरी ने कहा की माँ गंगा की हालत आज आइसीयु मे भर्ती मरीज़ के समान हो गई है अगर जल्दी ही ठोस प्रयास ना करे गए तो परिणाम गम्भीर हो सकते है मातृ सदन के संतो ने पहले भी माँ गंगा के लिए अनेक बलिदान दिए है ये वचन वाले संत है इस लिए सरकार को जल्दी निर्णय लेना चाहिए अन्यथा प्रदेश व्यापार मण्डल भी आन्दोलन का रास्ता अपनाएगा जिसके परिणाम की जिम्मेदारी सरकार की होगी ।

समर्थन देने वालो मे व्यापारी नेता संजीव कुमार,विजय धिमान,सुरेश मखीजा,विकास बोहरा,अरविन्द चौधरी,विपिन राणा,दीपक काला,पुष्पेंद्र गुप्ता,मिथिलेश वर्मा व जगदीप  भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

हरिद्वार के लोगो ने दिया तपस्या को समर्थन

गंगा में अविरलता और खनन के विरुद्ध तपस्या पर बैठे मातृ सदन के संत पूज्य स्वामी शिवानंद सरस्वती जी महाराज की तपस्या का आज नौवां दिन है ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की तपस्या का 27वां।
पूज्य गुरुदेव प्रतिदिन मात्र ३ ग्लास सादे जल पर है।

गंगा की अविरलता बनाए रखने के समर्थन में आज हरिद्वार के स्थानीय लोगो ने आश्रम आ कर समर्थन दिया। हरिद्वार लेडीज क्लब ने आ कर साध्वी पद्मावती और उनकी माता जी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

युवा पर्यावरण एक्टिविस्ट कुमारी रिद्धिमा पांडे ने कहा कि गंगा में एक तरफ सीवेज नालों की गन्दगी मिलाई जाती है और दूसरी तरफ उसी गंगा को मां बोल कर आरती की जाती है। यह बेहद गलत बात है। अगर गंगा सच में मां है तो उनको आदर से रखना चाहिए। अगर नही रख सकते तो मान जाए की गंगा मात्र एक नदी है। उन्होंने बड़े बड़े भवनों में रहने वाले, ब्रांडेड कपड़े पहनने वाले संत जो अपने आप को स्वामी कहते है, उन के पाखंड पर प्रश्न उठाया। मातृ सदन में प्रकृति के बीच रहने वाले संतों को तपस्या को भी संज्ञान में लिया।

हरिद्वार लेडीज़ क्लब की अध्यक्ष शशि झा, सचिव अंजू मिश्रा ने अपना समर्थन देते हुए कहा कि गंगा की नैसर्गिकता बनाए रखने के लिए गंगा में बांध और खनन सबसे बड़े विध्न है। गंगा की अविरलता बनाए रखने में मातृ सदन को समर्थन देते हुए उन्होंने १ दिन के अनशन का ऐलान किया।

साहस ज़ीरो वेस्ट से प्रणव नारंग और एनी फिलिप ने भी आ कर समर्थन दिया।

इस अवसर पर खुशबू, दीपमाला, सरिता शर्मा, पूजा, लता जोशी, सिद्धार्थ मिश्रा, चयनिका आदि मौजूद रहे।

Shri Gurudev’s statement on 20th August 2020

आज परम पूज्य श्री गुरुदेव जी की तपस्या का 18वां दिन है। मोदी सरकार ने केवल अपने लिखित आश्वासनों का उल्लंघन ही नहीं किया बल्कि जो आश्वासन क्रियान्वित हो चुका था उसका भी उल्लंघन की है। इस बीच शेखावत जी से कोई तीसरा व्यक्ति बात करना चाहता है तो वे बात भी नहीं करते हैं साथ ही त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार नाना प्रकार से षडयन्त्र कर गंगाजी में जेसीबी और पोकलैण्ड से खनन करवाता है और स्टोन क्रेशरों को अवैध खनन की माल को खपाने का पूरा छूट दे रहा है। वहीं मोदी सरकार को बारम्बार लिखने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस प्रकार सरकार एक तरफ वादाखिलाफी करती है और दूसरे तरफ उसका पालन के लिये कोई सात्विक तपस्या करते हैं तो उनकी अवहेलना करती है। ऐसे में परम पूज्य श्री गुरुदेव जी अपने पूर्व संकल्प के अनुसारए जिसमें उन्होंने कहा था कि वे जल की मात्रा को कम करते करते शून्य कर देंगेए वर्तमान में ले रहे 05 गिलास करीब डेढ़ लीटर जल को घटाकर 30 अगस्त 2020 से 04 गिलास कर देंगे।

When will Ganga become free?

Today India celebrates the 74th Independence Day – an independence which came as a result of freedom struggle that lasted over 90 years and took sacrifice of millions of lives.

Question today is, when will our sacred river Ganga, our life line for crores of people in Inda and the centre of our belief system.. when will Ganga become independent from the shackles of corruption and her waters will flow freely?

When will Ganga get freedom? Today is 13th day of Continuous Fast by Swami Shivananda, Matri Sadan

29 मार्च 2020 को परमपूज्य श्री गुरुदेव जी द्वारा स्थगित की गई तपस्या 03 अगस्त 2020 से पुनः प्रारम्भ हो गई है


DEMANDS
1. As per the demand being asked by Swami Gyaan Swaroop Sanand ji to decommission all the proposed as well as under construction Hydro electric projects on River Ganga and its tributary rivers in Uttarakhand.
2. To issue Government Order mentioning complete ban on mining in Ganga and its tributary rivers and immediate closure/removal of all Stone Crushers within 5 km periphery from Ganga.
3. To set up a high level investigation committee to enquire about persons whose acted against the NMCG order dated 9th October 2018, which was complied after the final cut and intimated to PM on 1st Oct 2019 about its execution.
4. Enforce Ganga Act proposed by Swami Sanand and make an Autonomous Institution named Ganga Bhakt Parishad which should include only those members who are dedicated to Ganga. This is to safeguard Ganga against mala fide intention of Chief Minister Shri Trivendra Singh Rawat and Shri Gajendra Singh Shekhawat who secretly conspired and cancelled this demand.
5. Swami Gyan Swaroop Sanand was kidnapped from Matri Sadan with a forced struggle, while he was in conscious and healthy state, and put up in AIIMS Rishikesh; he was then murdered; following this, Brahmchari Aatmbodhanand sat on Anshan to continue for the demands, he was also planned to meet the same conspiracy like Sanand ji, to be poisoned in AIIMS Rishikesh; after that Sadhvi Padmavati who had followed the footstep of Br Aatmbodhanand was forcefully taken away from Matri Sadan after breaking her door at night around 11 pm. Efforts made to rape and tarnishing her Sadhvi image, failing in this she was poisoned strongly the effect of which still can be seen today. Later again Br Aatmbodhanand was on Anshan, he was also mistreated in the hospital after being taken there illegally and after sometime throwing him out of the hospital and sending back to Ashram, CM Trivendra Singh Rawat misusing his powers as Chief Minister. A high level committee to be formed to investigate the above and many other unconstitutional acts by CM, administration and Government.

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 – 17:02

Author

हिमांशु भट्ट

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिमत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे। शेष अन्य सदस्यों में मातृ सदन का एक प्रतिनिधि तथा दो अन्य का निर्धारण वह टीम करेगी। इस टीम को सरकार से संवाद करने का दायित्व भी सुपुर्द किया गया है।

 

इस दौरान दक्षिण भारतीय फिल्मो के सुप्रसिद्ध अभिनेता पवन कल्याण ने स्वामी सानंद की अपूरणीय क्षति से उनके हृदय में हुई वेदना को सार्वजनिक करते हुए कहा कि जब उन्होंने सुना था कि स्वामी सानंद नहीं रहे तो उन्हें बहुत गहरा आघात हुआ और अपनी जिम्मेदारी का बोध हुआ। उन्होंने कहा कि स्वामी के जाते ही मुझे ऐसा लगा कि स्वामी जी के निधन का दोषी हर भारतीय है, क्योंकि मां गंगा सभी की है और गंगा को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है। पवन कल्याण ने कहा कि हमने 2014 में मोदी सरकार का समर्थन किया था ताकि गंगा का पुनर्जीवन सम्भव हो सके, लेकिन सौ से ज्यादा दिनों तक अनशन के बाद स्वामी सानंद जी का चले  जाना अत्यन्त दुखदायक रहा। इससे हमने महसूस किया कि यदि सरकार गंगा के प्रति संवेदनशील होती तो ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि वे स्वामी सानंद के बलिदान के समय मातृसदन नहीं आ पाए थे जिसका उन्हें बहुत दुख है, लेकिन आज एक साल बाद वे यहाँ उपस्थित हैं। यहाँ बहुत से आश्रम हैं लेकिन मातृ सदन सबसे विशेष है जिसके सन्यासी गंगाजी के लिए खड़ें हैं।

पवन कल्याण ने कहा कि गंगा को भारतवर्ष में माँ का दर्जा प्राप्त है और गंगा नदी का सम्मान विश्वव्यापी है। गंगा की रक्षा के लिए हम गंगा के इस आंदोलन से युवाओं को जोड़ेंगे। पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने कहा कि हम दायित्व का निर्वाह पूरे मनोयोग से करेंगे तथा गंगा को अविरल बनाने के लिए सरकार को बाध्य करेंगे.। जल पुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कहा कि गंगा के पाँच सरोकार अध्यात्म, संस्कृति, सत्यनिष्ठा, समाज तथा युवा को बनाकर आगे के आन्दोलन चलाए जाएँगे। अध्यक्षीय वक्तव्य में स्वामी शिवानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन की कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए मातृ शक्ति आगे आ रही है और 23 वर्षीय मातृ सदन की साध्वी ब्रह्मचारिणी पद्मावती अपने प्राणों के उत्सर्ग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि वे अभी भी चाहते हूँ कि सरकार को सदबुद्धि हो लेकिन सरकार को सदबुद्धि तभी होगी जब जनमानस जागरुक होगा। बसवराज पाटिल ने कहा कि बड़े मन से बड़ा कार्य होता है तथा आन्दोलन के लिए सही समय का चुनाव करना यथार्थ रूप से सबसे अधिक आवश्यक है। साथ ही सभा की समाप्ति से पहले सभी ने स्वामी सानंद जी के संकल्प को पूरा करने के लिए अपना पूरा प्रयास करते रहने का संकल्प लिया।