'सत्यमेव जयति नानृतम्'

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ब्र आत्मबोधानंद जी के सत्याग्रह की पूर्णाहुति

आज दोपहर 1 बजे हरिद्वार के जिलाधिकारी श्री विनय शंकर पांडेय ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की मांगों को मानते हुए जूस पिलाकर सत्याग्रह की पूर्णाहुति कराई।

मातृ सदन की मांगों पर कार्यवाही करते हुए जिलाधिकारी जी ने अनार का जूस पिलाया और ब्र आत्मबोधानंद जी के सत्याग्रह की पूर्णाहुति हुई । गांधी जयंती से एक दिवस पूर्व हुई सत्य, सर्वोदय और अहिंसा की जीत 🙏

Satyagraha of Br Aatmbodhanand is fulfilled today when Haridwar District Magistrate Mr Vinay Shankar Pandey issued letters in accordance with the demands of the Satyagraha.

One day before Gandhi Jayanti on 2nd October, the fulfilment of Matri Sadan’s Satyagrah is a testimony to the powers of Truth, Ahimsa, Welfare for all (Sarvodaya) and Satyagrah.

Br Aatmbodhanand stops taking honey from today (42nd day)

In a scathing open letter written to Hon’ble President of India, Hon’ble Chief Justice of India, Hon’ble Prime Minister of India, Hon’ble Chief Justice of Uttarakhand High Court, Hon’ble Governor of Uttarakhand, Hon’ble Chief Minister of Uttarakhand and Hon’ble Home Minister of Uttarakhand, Br Aatmbodhanand has raised pertinent questions about about the status of his demands.

None of the demands in this Satyagrah are beyond the scope of the powers vested in the hands of the Administration by the Constitution of our country. All demands are only and only to ensure the aviralta of Ganga and for investigation on the deaths of Swami Nigamanand Saraswati and Swami Sanand ji, and the brutal behavior done with Sadhvi Padmavati.

From today 28th Sep 2021 onwards, Br Aatmbodhanand will only take lemon, salt and water.

आज अपनी तपस्या के ४२वें दिन ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द ने शहद भी त्यागने का निर्णय लिया है। अब वह केवल नींबू पानी और नमक लेते रहेंगे। उन्होंने कहा कि तपस्या के इतने दिनों के बाद भी सरकार का रवैया बिल्कुल नाकारात्मक रहा है। हरिद्वार के जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक अभी तक एक बार भी मिलने नहीं पहुंचे। आत्मबोधानन्द जी ने कहा कि गंगा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले स्वामी निगमानन्द जी की हत्या के जांच के आदेश CBI कोर्ट ने 9 सितम्बर, 2015 देने के बावज़ूद CBI ने मामले में आगे जांच नहीं की। CBI को किसने अधिकार दिया कि वह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करे? 2018 में स्वामी सानंद जी की हत्या की जांच भी सरकार ने नहीं होने दी। इन्हीं कारणों की वजह से पद्मावती जी के साथ 2020 में जो कुछ भी हुआ, वह सरकार की निगरानी में सरकार द्वारा ही करवाया गया। अगर निगमानन्द जी और सानंद जी के दोषीयों को सज़ा मिल गयी होती तो पद्मावती जी की ये हालत नहीं होती। इन सभी लोगों को सरकार द्वारा जबरन आश्रम में 144 धारा लगाकर उठवाया गया, जो सरासर गैर कानूनी है। खनन विरोधी जितने भी आदेश केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गये, राज्य एवं जिला प्रशासन ने खुलेआम समय समय पर उसका उल्लंघन किया। मातृ सदन द्वारा सरकार के इस रवैये के खिलाफ जितने भी मुकदमें दर्ज़ करवाये गये, उनपर कभी कोई सुनवायी नहीं हुई। इनकी जांच की मांग हमारा संवैधानिक अधिकार है। सरकार अपने द्वारा दिये गये आश्वासनों का पालन करे, बस हमारी इतनी ही मांग है। जब सरकार वादाखिलाफी करती है, तब माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ जाता है कि वह समाज के ईमानदार लोगों के खिलाफ साजिश कर उन्हें जेल भेजवा देते हैं, और जिला न्यायालय के कुछ जज उन माफियाओं का साथ देती है। हम केवल न्याय की मांग कर रहे हैं। सरकार और न्यायपालिका इस तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रह सकते। इसलिए सरकार जबतक हमारी मांगें नहीं मानती, तबतक यह तपस्या जारी रहेगी।

Read full text of the letter here :

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Friday’s for Future stand in support of Br Aatmbodhanand

कल शुक्रवार दिनांक 24 सितंबर2021 को मातृ सदन हरिद्वार में फ्राइडेस फ़ॉर फ्यूचर की सदस्य चाइल्ड एक्टिविस्ट रिद्धिमा पाण्डे अपने ग्रुप के साथ ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी की तपस्या के 38वे दिन समर्थन देने पहुंची।
उन्होंने कहा कि लोगों को पता है कि गंगा में खनन हो रहा है पर्यावरण खराब हो रहा है फिर भी कुछ नही करते। सरकार बहुत सारे प्रोजेक्ट करती है जैसे नमामि गंगे इत्यादि। गंगा के लिए बहुत पैसे खर्च किये जाते हैं फिर भी गंगा वैसी ही रहती है। किंतु जब कोरोना काल में कुछ नही किया गया तो गंगा साफ होने लगी।
अविरल प्रोजेक्ट के प्रणव नारंग ने बताया कि जाने अनजाने हम बहुत सारा प्लास्टिक गंगा में फेंक देते हैं।

मोनाली ने दुखी होते हुए बताया कि किस प्रकार उसके पिता को ऑक्सिजन की कमी के कारण जीवन से हाथ धोना पड़ा।
साध्वी पद्मावती ने कहा कि गंगा नहीं तो भारततवर्ष भी नही बचेगा। उन्होंने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की तपस्या को समर्थन दे।
शुभ पांडे ने सिंगापुर में पर्यावरण को बचाते हुए कैसे वेस्ट मैनेजमेंट किया जाता है, इस बारे में जानकारी दी।
पल्लवी ने कहा कि रोड बनाने के लिए बड़े बड़े पेड़ काट देते हैं और पर्यावरण को नष्ट करते हैं। बड़े पेड़ काट कर छोटे पौधे लगा कर कर्तव्य पालन कर लेते हैं, देखभाल नही करते। इस तरह से सिर्फ ऊपरी तौर से पर्यावरण संरक्षण नही हो सकता।
उड़ीसा की श्रेया ने कहा कि दूर दूर से गंगा को माँ मानते हुए लोग आते हैं और गंगा को दूषित कर जाते हैं।
नमन ने कहा कि जब गंगा को अपनी मां मानते हैं तो उसकी परवाह भी करनी चाहिए।

महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष श्रीमती अंजू मिश्रा, वार्ड अध्यक्ष श्रीमती सूचि चेरी और रचना शर्मा, आई आई टी कानपुर के मनीष, डॉ वैभवी, आकाश ऋतुराज, अविरल प्रोजेक्ट वेस्ट मैनेजमेंट से सुलगना, गौरव उपस्थित रहे। कार्यक्रम वर्षा वर्मा द्वारा संचालित किया गया।

Activist Ridhima Pandey and team stand in support
Haridwar citizens also joined the movement

Friday’s for Future – global strike will be held in Matri Sadan on 24th Sep 2021

Friday’s for Future is a youth-led and organized global climate strike movement.

Taking Br Aatmabodhnanad ji’s Satyagrah to the international forum, the next global strike will be organised in Matri Sadan campus. You are invited to join the movement.

Friday’s for Future stands in support for Ganga Satyagraha of Br Aatmbodhanand

19 सितम्बर 2021 को हुई गंगा गोष्ठी

दिनांक 19 सितम्बर २०२१

ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी के तपस्या के 33वें दिवस पर मातृ सदन में सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें देशभर से बुद्विजीवी और पर्यावरणविद्ध शामिल हुए। 100 से भी ज्यादा लोगों ने मातृ सदन आकर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी के सत्याग्रह को अपना समर्थन प्रदान किया।
अनशन को लेकर सरकार की पड़पीड़नशीलता के खिलाफ खेद प्रकट किया और साथ ही अनशन को देशभर से समर्थन दिलवाने का संकल्प भी लिया।
मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानन्द जी महाराज ने कहा कि सरकार की वादा खिलाफी के मध्यनज़र ही मातृ सदन को लगातार आंदोलन करने पड़ते रहे है। इस बार के अनशन में कोई नई मांग नहीं है। मातृ सदन से जो सरकार ने लिखित में वादें किए है सरकार उन्हें अक्षरक्षः पालन करे। स्वामी निगमानंद सरस्वती और स्वामी सानंद जी की मृत्यु के लिए सरकर निश्चित रुप से जिम्मेदार है। साध्वी पद्मावती के साथ हुई बर्बरता पर भी लगातार मौन साधे हुए है। इन सभी मामलों पर तत्काल जाँच बैठे । तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा।

मुख्य अतिथियों में:
मैगसेसे अवार्ड विनर डा. संदीप पाण्डेय जी ने याद दिलाया कि स्वामी निगमानंद सरस्वती की मृत्यु अस्पताल में हुई, सानंद जी को भी उनकी इच्छा के विपरीत स्वस्थ अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया और अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गई । साध्वी पद्मावती को प्रशासन ने उठाया और उनके साथ ऐसा बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया। ऐसा क्या है कि जिनको भी पुलिस उठाकर ले जाती है उनकी मृत्यु हो जाती है। साधु गंगा के लिए अपनी जान की बाजी लगा रहे है और किसी को समझ नहीं आता कि सरकार क्यों नहीं चेत रही और आम आदमी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा।
युवा पर्यावरणविद कुमारी रिद्धिमा पाण्डेय ने कहा कि हर युवा अगर अपने स्तर पर जिम्मेदारी उठाए तभी पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है। उन्होंनें कहा कि हरिद्वार में इतने आश्रम है सबका कचरा गंगा में ही फेंका जा रहा है। गंगा विश्व की दस सबसे ज्यादा प्रदूषित नदियों में से एक है। साथ ही साथ समुद्र में सबसे ज्यादा प्लास्टिक पहुँचाने में भी गंगा नदी दुनिया की दस सबसे बड़ी नदियों में से एक है। उन्होंने कहा कि वे मातृ सदन के सत्याग्रह को अन्तराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना चाहती हैं।

विद्याविद् डा. मानसी बाल भार्गव ने कहा कि गंगा बहुत भाग्यशाली नदी है। देश भर की नदियों के पास भी उतना बजट नहीं हैं जितना अकेले गंगा के पास है। परन्तु गंगा की जो दुर्दशा हो रही हैं वही बाकी नदियों के साथ भी हो रही है। उन्होंने हमारे शरीर और जल के बीच की समरुपता के बारे में बताया। नाली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के नाड़ी शब्द से हुई है। पानी से बने इस शरीर में जिस प्रकार प्राणों का संचार होता है ठीक उसी प्रकार छोटी छोटी जल की इकाइयों को जैसे नाली तलाब इत्यादि को भी ठीक से संभाल कर रखने से हमारी नदियों की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि गंगा को बचाने के लिए महिला शक्ति को भी अपनी आवाज़ उठानी होगी क्योंकि इतिहास में जो भी पर्यावरण आंदोलन हुए हैं उनमें महिलाओं का बहुत बड़ा हाथ रहा है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने फोन से अपना समर्थन दिया। उन्होंनें कहा कि गंगा की रक्षा के लिए लोगों को हठ करने की आवश्यकता है और उन्होंनें कहा कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी का जीवन बेहद मूल्यवान है। साथ ही कहा कि गंगा और बाकी नदियों को बचाने का भी हमें सतत प्रयास करना चाहिए।
खुदाई खिदमतगार के श्री फैसल खां ने कहा कि जबतक मन में प्रेम नहीं होगा तब तक अहिंसा भी नहीं होगी। अगर दूसरे के प्रति मेरे मन में सद्भावना नहीं होगी तब वह मेरा धर्म नहीं होगा दिखावा होगा। उन्होने रामचरित मानस का उल्लेख करते हुए कहा कि मिले ना रघुपति बिन अनुरागा, किए जोग तप ज्ञान विरागा।
साध्वी पद्मावती ने कहा कि गंगा नहीं तो भारतवर्ष नहीं, माँ गंगा को बचाना है बेहद जरुरी।
हरिद्वार के वरिष्ठ चिकित्सक डा. विजय वर्मा ने कहा कि किसी भी घटना को अलग से देखना अपनी ज़िम्मेदारी से भागना है। प्रकृति और मानव सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और गंगा की अविरलता में बाधा होने से हमारी जीवन शक्ति में भी बाधा आती है।
भोपाल सिंह चौधरी ने कहा सरकार तक आवाज़ पहुँचाने के लिए संगठन की ज़रुरत है और वह अपने संगठन से इस आवाज़ को सरकार तक पहुँचाने में मदद करेंगें।
उत्तराखण्ड महिला मंच से ऊषा भट्ट और निर्मला भिष्ट ने आकर समर्थन किया। उन्होंनें कहा कि एक तो पहाड़ में बांध बनने ही नहीं चाहिए, और बांध बनाने के बाद सरकार जो आम नागरिकों से साथ वादा खिलाफी करती है वह उनके साथ धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को अभियान में बदलना होगा।
गंगासागर से गंगोत्री तक मोटरसाइकिल पर यात्रा कर रहे सुजोय मण्डल और रबी कांत ने भी आ कर समर्थन दिया।
सुंदरबन, बंगाल से नदी बचाओ अभियान के कल्लौल रोय ने कहा की इगो को इको से बदल दीजिए।
सत्याग्रह को आगे बढ़ाने के लिए हरिद्वार लेडीज़ क्लब की अंजू मिश्रा, कांगेस लीडर संजीव चैधरी, रामेश्वर गौड़ आदि ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

दिनांक 18 अगस्त से मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी तपस्या के लिए प्रस्तुत

दिनांक 18 अगस्त 2021 से मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद जी पुनः तपस्या के लिए प्रस्तुत हैं.

अभी अभी 3 दिन पूर्व ही हमने आज़ादी की 75 विन सालगिरह जोरशोर से मनाई | ये आज़ादी हमने आज से 75 वर्ष पूर्व अंग्रेजो से लड़ाई लड़ कर हासिल की थी| स्वाधीनता संग्राम जो कि लगभग 90 वर्ष चला, और हज़ारों लाखों लोग इस आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए| कुछ गुमनाम और कुछ प्रसिद्ध योद्धाओं का हम स्मरण करते हुए उनको सम्मान सहित श्रद्धांजलि देते हैं|

इन 75 वर्षों में देश ने हर ओर प्रगति की| आर्थिक हो या वैज्ञानिक| परन्तु इस विकास की दौड़ में पर्यावरण को भूलते चले गए| विकास का सही मतलब भूल कर पश्चिमी देशों को देख कर उन्हें ही अनुकरण करने को विकास मानने लगे|

विकास माने तो आर्थिक विकास| किस तरह से ज्यादा से ज्यादा कमाई की जाए इसी में बुद्धिजीवी वर्ग का दिमाग लगा रहा|

उत्तराखण्ड प्रदेश जो कि समृद्ध सम्पदा वाला प्रदेश है, अपनी मूल प्रवृत्ति को भूल कर विकास रूपी मायाजाल में फंस कर रह गया|

उत्तराखण्ड से निकलने वाली महिमामंडित नदी गंगा प्रदेश की एकमात्र शान है, जिसके कारण यहाँ पूरे देश ही नहीं बल्कि विश्व से आने वालों का तांता लगा रहता है|चाहे बच्चे का जन्म, मुंडन हो या मृत्युपरांत अस्थि विसर्जन सब गंगा किनारे ही होता है | पूरे भूमंडल गंगा एकमात्र ऐसी नदी है जिसे पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या हुई और अब रक्षा के लिए भी तपस्या ही हो रही है|

गंगा जी को अब दैवीय नदी न मानकर मात्र एक कमाई का साधन माना जा रहा है| गंगा की पवित्रता, पुण्यता को पीछे रख सिर्फ अर्थ को सब कुछ मानकर गंगा जी का भीषण शोषण किया जा रहा है और आम आदमी किंकर्तव्यविमूढ़ बना हुआ है| आस्था और अर्थ, सत्य और मिथ्या के बीच इस संग्राम में अर्थ की विजय होती दिख रही है| किन्तु सत्य कभी नहीं छुप पाया | सत्य की ही अंत में विजय होती है|

मातृसदन, हरिद्वार दो दशकों से अधिक पर्यावरण प्रदूषण और भ्रष्टाचार के विरोध में संघर्षरत है| महात्मा गाँधी जी द्वारा दिखाई सत्याग्रह की राह पर चलते हुए अब तक 66 बार अनशन लिया है मातृसदन के संतों ने| स्वामी निगमानंद एवं स्वामी सानंद जी ने अपने जीवन की बाज़ी लगा दी|साध्वी पद्मावती भी मौत से जंग लड़कर आई है और अभी तक सामान्य अवस्था नहीं प्राप्त कर पाई हैं|
स्वामी निगमानंद और स्वामी सानंद जी की मौत/हत्या की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है, वर्ष 2011 में स्वामी निगमानंद और 2018 में स्वामी सानंद जी की एम्स अस्पताल में अचानक मृत्यु होने के राज का अभी तक सरकार पता नहीं लगा पाई|

न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं हुआ, सरकार द्वारा राज्य सभा में आश्वासन दिए जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई|
साध्वी पद्मावती के साथ तपस्या के दौरान वीभत्स व्यवहार हुआ उसकी सुनवाई अभी तक नहीं हुई|
भ्रष्टाचार का ये मंजर है कि निरपराध विद्वानों को बिना कोई कारण बताये जेल भेजा जा रहा है| डॉ निरंजन मिश्र संस्कृत के प्रकांड विद्वान् जिनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों पर उन्हें साहित्य अकादमी और कालिदास सम्मान पुरस्कार से सुशोभित किया गया आज पिछले एक माह से बिना अपराध, बिना वारंट के जेल में हैं|

इन्ही कारणों से ब्रहमचारी आत्मबोधानंद जी पुनः तपस्या पर हैं|

गुरुदेव की तपस्या की पूर्णाहुति
Fast ended successfully

NMCG से पत्र ले करके श्री भरत पाठक जी रात को 12:30 am मातृ सदन आये इस आश्वासन के साथ कि खनन बंद करने का आदेश दिया गया है तथा परियोजनाओं पर विचार विमर्श कर कार्यवाही की जाएगी ।

On April 2, 2021 at 12:30 am Shri Bharat Pathak of Ganga Vichar Manch reached Matri Sadan and handed over the letter from NMCG (National Mission for Clean Ganga) containing order for close Mining in Ganga and promise to take action regarding Hydro projects with the consent of Matri Sadan.

Shri Gurudev ending TAPASYA

श्री गुरुदेव की तपस्या हुई उग्र

मातृ सदन की तपस्या पर सरकार की चुप्पी कायम है। गंगा पर बन रहे बांध परियोजनाओं एवं खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार की तरफ से अभी तक कोई जवाब नही आया है।

दिनांक 27 मार्च से से श्री गुरुदेव जी अपनी तपस्या को उग्र करते हुए मात्र दो ग्लास जल लेना प्रारंभ कर दिया है।