'सत्यमेव जयति नानृतम्'

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Shri Gurudev’s statement on 20th August 2020

आज परम पूज्य श्री गुरुदेव जी की तपस्या का 18वां दिन है। मोदी सरकार ने केवल अपने लिखित आश्वासनों का उल्लंघन ही नहीं किया बल्कि जो आश्वासन क्रियान्वित हो चुका था उसका भी उल्लंघन की है। इस बीच शेखावत जी से कोई तीसरा व्यक्ति बात करना चाहता है तो वे बात भी नहीं करते हैं साथ ही त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार नाना प्रकार से षडयन्त्र कर गंगाजी में जेसीबी और पोकलैण्ड से खनन करवाता है और स्टोन क्रेशरों को अवैध खनन की माल को खपाने का पूरा छूट दे रहा है। वहीं मोदी सरकार को बारम्बार लिखने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इस प्रकार सरकार एक तरफ वादाखिलाफी करती है और दूसरे तरफ उसका पालन के लिये कोई सात्विक तपस्या करते हैं तो उनकी अवहेलना करती है। ऐसे में परम पूज्य श्री गुरुदेव जी अपने पूर्व संकल्प के अनुसारए जिसमें उन्होंने कहा था कि वे जल की मात्रा को कम करते करते शून्य कर देंगेए वर्तमान में ले रहे 05 गिलास करीब डेढ़ लीटर जल को घटाकर 30 अगस्त 2020 से 04 गिलास कर देंगे।

Call to the Constitution of India

Constitution is the fundamental requirement of running a nation. The Constitution is that set of rules which ensures the rights, duties, working and governance of any country or organization.

But what to do when Constitution is being violated by the same ones who promised to be its custodian?

In India, river Ganga is considered as the National River. The Ganges is an exceptional river, widely described in our ancient texts. In Rigveda 10.75, Skandpuraan, Bhagavad Gita 10.31, Manusmriti, Vishnu Puraan 2.8.120-121, Bhavishya Puraan, Varaha Puraan, Padmapuraan Srishikhand, 60.35, Kashikhand 27.80, 27.129-131 Mahabharata Van Parva, Anushashan chapter, Narada Puraan, Kurma Puraan, Matsya Puraan etc., Ganga has been described as ancient and significant. The river is considered sacred, has religious sanctity, and the water has strong medicinal value.

It is a matter of deep sorrow that Ganga currently is being evaluated only and only through an economic lens.  Be it through by constructing dams, mining stones in the foothills, driving steamers for tourism & cargo, the invaluable specialties of the river are being ignored to treat it like a trade commodity. In the name of Ganga’s cleaning, only the ghaats are being cleaned. The rest is being covered by self-applauds.

Today, the 71st day Republic Day marks 43rd day of continuous fast of Sadhvi Padmavati, of Matri Sadan Haridwar. In the last 43 days, she has not had a morsel of grain, and has been living only on lemon water, honey and salt. The authorities are consciously ignorant. Rather, there is immense pressure on her, to end the fast without any resolution of her demands. There are said and unsaid threats to capture her, her Guru Swami Shivanand ji, by declaring them Naxalities.

Famous scientist and first Member Secretary of Central Pollution Control Board Late Dr. GD Agarwal / Swami Sanand ji fasted for 111 days for Ganga Act. However, even though he was in perfect health, he was forcefully hospitalized, then allegedly killed. Well-wishers were not even allowed to see his body, let alone perform the last rites. The man who sacrificed his life for Ganga, didn’t even get a drop of Ganga-jal on his death-bed.

Today, we are celebrating this Republic Day with joy and gala. But the Constitution of India is being taken for a ride. In article 51A, protection of environment is a fundamental duty of an Indian Citizen. It is wrenching to see that the fundamental duties being violated by the same ones who promised to be its custodian.

 


संविधान देश को चलाने की  मूलभूत आवश्यकता है|विश्व के हरेक राष्ट्र का संविधान है| संविधान नियमों का वह समूह है जो देश राज्य या अन्य संगठनों की कार्यप्रणाली शक्ति, अधिकार दण्ड इत्यादि को सुनिश्चित करता है

 

गंगा जी को राष्ट्रीय नदी का दर्जा हासिल है| गंगा एक विशेष नदी है जिसके विषय में पुराणों और उपनिषदों में व्यापक रूप से वर्णन किया गया है|ऋग्वेद 10.75, स्कंद्पुरण, भागवत गीता 10.31, मनुस्मृति, विष्णु पुराण 2.8.120-121, भविष्य पुराण, वराह पुराण, पद्मपुराण सृष्टिखंड, 60.35, काशीखण्ड 27.80,  27.129-131 महाभारत वन पर्व, अनुशासन पर्व, नारद पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण इत्यादि में गंगा को प्राचीन एवं महत्वपूर्ण बताया है|

दुःख का विषय है कि वर्तमान में गंगा को सिर्फ और सिर्फ आर्थिक दृष्टि से ही मूल्यांकित किया जा रहा है| चाहे गंगा पर बाँध बनाकर, तलहटी में खनन करवा कर, गंगा में स्टीमर चलाकर, मालवाहक बनाकर …. अनगिनत प्रकार से गंगा की अन्य विशेषताओं को दरकिनार कर व्यापारिक बनाया जा रहा है| गंगा की सफाई के नाम पर गंगा घाटों को की सफाई कर पीठ थपथपाई जा रही है| गंगा का दोहन किया जा रहा है|

हमारे भारत देश के संविधान में मूलभूत कर्तव्यों  में 51ए की उपधारा बी, जी, आई में पर्यावरण के सरंक्षण हेतु अधिकार और कर्तव्यों का समावेश है| गंगा की व्यापकता पौराणिकता, धार्मिक आस्था, औषधीय महत्त्व के परिपेक्ष्य में गंगा जी के लिए अलग से नियमावली बनाने की घोर आवश्यकता है|

आज गणतंत्र दिवस की 71वीं वर्षगांठ पर गंगा जी के सरंक्षण के लिए साध्वी पद्मावती की तपस्या का 43वां दिन है| विगत 43 दिनों से अन्न का त्याग कर  वें सिर्फ नींबू पानी नमक और शहद पर हैं किन्तु कोई सुनवाई नहीं है| इसके उलट उन्हें और उनके शुभचिंतकों पर अनशन त्यागने का दबाव बनाया जाता है| उन्हें और उनके पूज्य गुरु को बंदी बनाने और नक्सल घोषित किया जाने का प्रयास किया जाता है|

प्रसिद्ध वैज्ञानिक और सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के प्रथम सदस्य सचिव स्वर्गीय डॉ जी डी अग्रवाल/ स्वामी सानन्द जी ने 111 दिन तक गंगा एक्ट के लिए अनशन किया, जिन्हें स्वस्थ अवस्था में जबरदस्ती अस्पताल ले जाकर मरवा दिया गया और उनके पार्थिव शरीर का न तो दर्शन करने दिया और न ही गंगा के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले स्वामी सानन्द के शरीर को गंगा जल की एक बूँद मिली|

इसी गणतंत्र दिवस को 1950 में संविधान लागू होने पर उल्लासपूर्वक मनाया जाता था | आज सत्तर वर्ष बाद जिसकी धज्जियाँ उड़ाई जा रहीं हैं| संविधान के मूलभूत अधिकारों का हनन किया जा रहा है|

साध्वी पद्मावती की तपस्या का आठवां दिन

Fasting Padmavati Strong determination

आज दिनांक २२ दिसंबर २०१९ को साध्वी पद्मावती की तपस्या का आठवां दिन है|

मातृ सदन पिछले बाईस वर्षों  से  पर्यावरण रक्षा हेतु गंगा जी के सरंक्षण को कृत संकल्प है, और  महात्मा गाँधी  जी की सत्याग्रह की राह पर चलते हुए अब तक साठ सत्याग्रह कर चुकी है| साध्वी पद्मावती का ये इकसठवाँ सत्याग्रह है जो कि पंद्रह दिसंबर २०१९ से प्रारंभ हुआ है| इससे पूर्व में  ४ मई २०१९  को ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी ने NMCG के डायरेक्टर द्वारा दिए गए लिखित वायदों (जो कि माननीय प्रधान मंत्री जी के संज्ञान में थे  ऐसा ऑफिसरों द्वारा बताया गया ), पर विश्वास करते हुए 194 दिनों के सत्याग्रह  को विराम दिया था |

छह महीने से अधिक समय होने के बाद भी कोर्ट के आदेशों का अनुपालन अभी तक नही किया

उन्ही की मांगों के विषय में दिए गए सरकार के लिखित एवं मौखिक आश्वासनों की पूर्ति हेतु साध्वी पद्मावती को सत्याग्रह करना पड़ रहा है|

गंगा संरक्षण: मातृ सदन में अब साध्वी पद्मावती बैठीं आमरण अनशन पर

मातृसदन हरिद्वार में साध्वी पद्मावती ने गंगा रक्षा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर रविवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। साध्वी ने मांग की है कि केंद्र सरकार को जल्दी ही गंगा ऐक्‍ट बनाना चाहिए। साध्वी ने उत्तराखंड में प्रस्तावित चार जल विद्युत परियोजनाओं को तुरंत निरस्त करने की भी मांग उठाई।
इस मौके पर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने सवाल उठाया कि जब रायवाला से भोगपुर तक गंगा और सहायक नदियों में खनन पर रोक लगाने की बात लिखित में कही गई है तो फिर श्यामपुर में खनन कैसे शुरू कराया गया। स्वामी शिवानंद ने कहा कि अब जब राज्य सरकार हरिद्वार में गंगा में खुलेआम अवैध खनन करा रही है इसलिए उनके आश्रम की अनुयायी साध्वी पद्मावती ने गंगा की रक्षा के लिए अनशन करने का निर्णय लिया है।

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 – 17:02

Author

हिमांशु भट्ट

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया। सभा में स्वामी सानंद के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्यनीति का निर्धारण किया तथा ध्वनिमत से निश्चय किया गया कि गंगा एक्ट बनाने का कार्य पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता वाली टीम करेगी, जिसके समन्वयक राष्ट्रीय अभिमान आन्दोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बसवराज पाटिल होंगे। शेष अन्य सदस्यों में मातृ सदन का एक प्रतिनिधि तथा दो अन्य का निर्धारण वह टीम करेगी। इस टीम को सरकार से संवाद करने का दायित्व भी सुपुर्द किया गया है।

 

इस दौरान दक्षिण भारतीय फिल्मो के सुप्रसिद्ध अभिनेता पवन कल्याण ने स्वामी सानंद की अपूरणीय क्षति से उनके हृदय में हुई वेदना को सार्वजनिक करते हुए कहा कि जब उन्होंने सुना था कि स्वामी सानंद नहीं रहे तो उन्हें बहुत गहरा आघात हुआ और अपनी जिम्मेदारी का बोध हुआ। उन्होंने कहा कि स्वामी के जाते ही मुझे ऐसा लगा कि स्वामी जी के निधन का दोषी हर भारतीय है, क्योंकि मां गंगा सभी की है और गंगा को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है। पवन कल्याण ने कहा कि हमने 2014 में मोदी सरकार का समर्थन किया था ताकि गंगा का पुनर्जीवन सम्भव हो सके, लेकिन सौ से ज्यादा दिनों तक अनशन के बाद स्वामी सानंद जी का चले  जाना अत्यन्त दुखदायक रहा। इससे हमने महसूस किया कि यदि सरकार गंगा के प्रति संवेदनशील होती तो ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि वे स्वामी सानंद के बलिदान के समय मातृसदन नहीं आ पाए थे जिसका उन्हें बहुत दुख है, लेकिन आज एक साल बाद वे यहाँ उपस्थित हैं। यहाँ बहुत से आश्रम हैं लेकिन मातृ सदन सबसे विशेष है जिसके सन्यासी गंगाजी के लिए खड़ें हैं।

पवन कल्याण ने कहा कि गंगा को भारतवर्ष में माँ का दर्जा प्राप्त है और गंगा नदी का सम्मान विश्वव्यापी है। गंगा की रक्षा के लिए हम गंगा के इस आंदोलन से युवाओं को जोड़ेंगे। पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने कहा कि हम दायित्व का निर्वाह पूरे मनोयोग से करेंगे तथा गंगा को अविरल बनाने के लिए सरकार को बाध्य करेंगे.। जल पुरुष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कहा कि गंगा के पाँच सरोकार अध्यात्म, संस्कृति, सत्यनिष्ठा, समाज तथा युवा को बनाकर आगे के आन्दोलन चलाए जाएँगे। अध्यक्षीय वक्तव्य में स्वामी शिवानन्द सरस्वती ने कहा कि गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन की कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए मातृ शक्ति आगे आ रही है और 23 वर्षीय मातृ सदन की साध्वी ब्रह्मचारिणी पद्मावती अपने प्राणों के उत्सर्ग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि वे अभी भी चाहते हूँ कि सरकार को सदबुद्धि हो लेकिन सरकार को सदबुद्धि तभी होगी जब जनमानस जागरुक होगा। बसवराज पाटिल ने कहा कि बड़े मन से बड़ा कार्य होता है तथा आन्दोलन के लिए सही समय का चुनाव करना यथार्थ रूप से सबसे अधिक आवश्यक है। साथ ही सभा की समाप्ति से पहले सभी ने स्वामी सानंद जी के संकल्प को पूरा करने के लिए अपना पूरा प्रयास करते रहने का संकल्प लिया।