'सत्यमेव जयति नानृतम्'

List of Satyagraha मातृसदन के सत्याग्रह

List of Anshan मातृसदन लिस्ट अनशन

मातृ सदन के सत्याग्रह / तपस्या का विवरण

क्रमांक प्रारंभ – समाप्ति की तिथि संत का नाम और सत्याग्रह का विषय दिन
1 03 मार्च से 16 मार्च 1998 दो सन्त स्वामी गोकुलानन्द सरस्वती व स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के द्वारा कुम्भ क्षेत्र को क्रशिंग व खनन मुक्त घोषित करने तथा गंगा की धारा से होकर जाने वाले किसी भी वाहन पर प्रतिबन्ध लगाने के लिये। 14
2 27 मई से 09 जून 1998 स्वामी निगमानन्द सरस्वती व स्वामी गुणानन्द सरस्वती जी का पवित्र गंगा से होकर जाने वाले वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाने के लिये। 14
3 01 जून से 09 जून 1998 स्वामी गोपिलानन्द जी का अनशन प्रशासन की बर्बरता के बाद शुरु हुआ था। 9
4 09 जनवरी से 21 जनवरी 2000 स्वामी निखिलानन्द सरस्वती व ब्रह्मचारी दिव्यानन्द जी का अनशन ईमानदार प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को पुनः हरिद्वार में नियुक्त करने व माफियाराज समाप्त करने के उद्देश्य सें 13
5 07 फ़रवरी से 18 फ़रवरी 2000 स्वामी गोकुलानन्द सरस्वती, स्वामी निखिलानन्द, स्वामी गोपिलानन्द सरस्वती, व ब्रह्मचारी मनोहर दास जी का अनशन माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के भ्रष्ट जज के विरुद्ध नैनी जेल में 12
6 09 फ़रवरी से 18 फरवरी 2000 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी के द्वारा मा. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आगे बैठे सन्तों को उठा लेने के बाद हरिद्वार में शुरु किया गया। 10
7 11 जुलाई से 29 जुलाई 2000 स्वामी गोपिलानन्द सरस्वती व ब्रह्मचारी नरेशानन्द जी का अनशन ईमानदार अधिकारियों को वापस लाने व स्वच्छ, स्पष्ट व पारदर्शी स्थानान्तरण नीति बनाने को लेकर 19
 

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19 जुलाई से 29 जुलाई ब्रह्मचारी दिव्यानन्द जी का अनशन प्रशासन के अमर्यादित व्चयवहार के विरुद्ध 11
9 12 अगस्त से 4 सितम्बर 2000 स्वामी श्री गोकुलानन्द सरस्वती व स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती जी का अनशन प्रशासन की वादाखिलाफी के खिलाफ पुनः शुरु हुआ क्योंकि प्रशासन ने मुख्य मन्त्री से मिलाने का वादा पूरा नहीं किया 23
10 26 अगस्त से 4 सितम्बर 2000 ब्रह्मचारी मनोहर दास का अनशन प्रशासन की अभद्रता के विरोध में शुरु हुआ। 10
11 05 सितम्बर से 24 सितम्बर 2000 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव स्वामी शिवानन्द जी महाराज जी का अनशन शुरु हुआ तो 7 सितम्बर 2000 को पुलिस ने जबरन श्री गुरुदेव सहित सभी सन्तों को जेल में डाला और सभी सन्तों का अनशन श्री गुरुदेव के साथ जेल में ही चला। जेल मे श्री गुरुदेव को आर्सेनिक जहर दिया गया। 20
12 24 जुलाई 2001 से 9 जनवरी 2002 स्वामी गुणानन्द सरस्वती व ब्रह्मचारी दिव्यानन्द जी का अनशन श्री गुरुदेव जेल में दिये गये जहर की माँग सी.बी.आई से कराने को लेकर शुरु हुआ। सत्याग्रहियों को 15 अगस्त, 2001 स्वतन्त्रता दिवस के दिन जेल भेजा गया। उस समय नित्यानन्द स्वामी उ.प्र. से अलग हुए उत्तराँचल के प्रथम मुख्य मन्त्री थे। 170
13 11अगस्त 2001 से 9 जनवरी 2002 स्वामी गोपिलानन्द जी ने सत्याग्रहियों को जबरन उठाकर ले जाने के विरोध में अपना अनशन शुरु किया 152
14 05 सितम्बर 2001 से 30 अक्तूबर 2001 स्वामी गोकुलानन्द सरस्वती जी का अनशन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर उत्तराखण्ड के भ्रष्ट मुख्य मंत्री नित्यानन्द स्वामी को हटाने के लिए 56
15 06 दिसम्बर 2001 से स्वामी सच्चिदानन्द जी का अनशन गाँधी पार्क देहरादून में तत्कालीन मुख्य मन्त्री श्री भगत सिंह कोश्यारी जी का मातृ सदन आकर वादाखिलाफी के विरोध में शुरु हुआ। NA
16 22 दिसम्बर 2001 से 4 मार्च 2002 स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी का अनशन श्री गुरुदेव को दिये जहर की जाँच सी.बी.आई. से करवाने को लेकर 73
17 08 अप्रैल से 22 अप्रैल 2003 ब्रह्मचारी दिव्यानन्द जी  का अनशन ध्वनि प्रदूषण विरोधी माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल के आदेश के अनुपालन हेतु। 15
18 06 अप्रैल 2004 से 12 अप्रैल 2004 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव स्वामी श्री शिवानन्द जी महाराज का अनशन अर्धकुम्भ 2004 में अव्यवस्था व भ्रष्टाचार के विरुद्ध 07
19 30 मार्च  से 05 अप्रैल 2007 स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी का अनशन मातृ सदन की सुरक्षा सम्बन्धी जाँच को लेकर 07
20 10 मई से 26 मई 2007 स्वामी गोपिलानन्द सरस्वती जी का अनशन  मातृ सदन की सुरक्षा, खनन माफिया व वन एवं भू-माफियाओं के विरुद्ध जाँच को लेकर 17
21 22 नवम्बर से 06 दिसम्बर 2007 स्वामी गोपिलानन्द सरस्वती जी का अनशन कुँभ क्षेत्र में खनन के विरुद्ध 15
22 20 जनवरी 2008 से 1 अप्रैल 2008 स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी का कुँभ क्षेत्र को क्रशिंग व खनन मुक्त घोषित करने के लिये 73
23 06 फरवरी से 07 मार्च 2009 ब्रह्मचारी दयानन्द का कुँभ क्षेत्र को क्रशिंग व खनन मुक्त घोषित करने के लिये 30
24 15 अक्तूबर 2009 से 26 मार्च 2010 ब्रह्मचारी दयानन्द का कुँभ क्षेत्र को क्रशिंग व खनन मुक्त घोषित करने के लिये 163
25 27 अक्तूबर 2009 से 06 फ़रवरी 2010 ब्रह्मचारी यजनानन्द का अनशन ब्रह्मचारी दयानन्द को पुलिस द्वारा जबरन उठाकर ले जाने के बाद शुरु हुआ। 103
26 18 नवम्बर 2009 से 09 जनवरी 201 स्वामी पूर्णानंद जी का अनशन कुम्भ एरिया के विस्तार को छोटा करने के विरोध में 53
27 20 जनवरी से 06 फरवरी 2010 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी का अनशन कुँभ क्षेत्र को घटाने के विरोध में।

शासन-प्रशासन ने कुँभ क्षेत्र को सुरक्षित रखने की माँग को लेकर शुरु किये गये इस आन्दोलन  (15 अक्तूबर 2009 से 26 मार्च 2010) को कुचलने में कोई कसर नहीं छोड़ीं। सन्तों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल में उत्पीड़न किया गया। 05 फरवरी 2010 को कुँभ क्षेत्र को वर्ष 1998 की भाँति पूर्ववत रखा गया।

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28 20 जुलाई से 24 अगस्त 2010 प्रोफेसर गुरुदास अग्रवाल जी (संन्यास बाद अब उनका नाम स्वामी ज्ञान स्वरुप सानन्द हो गया है। वह पूर्व में आइआइटी कानपुर के विभागाध्यक्ष और केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के प्रथम सदस्य सचिव के साथ-साथ भारत के प्रथम वैज्ञानिक हैं जिसे भारत सरकार ने सरकारी खर्चे पर पर्यावरण के क्षेत्र में उच्चत्तर ज्ञान हासिल करने हेतु विदेश भेजा था) ने 20 जुलाई 2010 से 24 अगस्त 2010 तक 36 दिनों तक गंगा के रक्षार्थ सत्याग्रह/अविच्छिन्न अनशन किया था, जिसके परिणाम स्वरुप तीन विद्युत परियोजनाओं पाला मनेरी, लोहारीनागपाला और भैरों घाटी को निरस्त किया गया। 36
29 18 नवम्बर से 11 दिसम्बर 2010 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव स्वामी श्री शिवानन्द जी महाराज जी का कुँभ क्षेत्र को भविष्य में सुरक्षित रखने हेतु खनन व क्रशिंग मुक्त करने सम्बन्ध स्पष्ट  शासनादेश जारी करने सम्बन्धी। 24
30 28 जनवरी 2011 से 19 फरवरी 2011 ब्रह्मचारी यजनानन्द का अनशन उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के दो भ्रष्ट माननीय न्यायाधीशों व रजिस्ट्रार जूडिशियल के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर 23
31 19 फरवरी से 13 जून 2011

 

स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी का अन्तिम सत्याग्रह।

स्वामी जी ने ब्रह्मचारी यजनानन्द जी का अनशन तुड़वाकर इस बलिदान हेतु अपने आपको आगे किया। सत्याग्रह के 68वें दिन 27 अप्रैल 2011 को जिला प्रशासन उनको बिल्कुल स्वस्थ व चेतन अवस्था में उठाकर मेडिकल चेकअप के नाम पर उनको जिला अस्पताल हरिद्वार ले जाया गया, वहाँ उनको पहले नस के माध्यम से ग्लूकोज चढ़ाया गया और फिर अगले ही दिन यानि 28 अप्रैल को नाक में पाईप डालकर तरल पदार्थ दिया गया जिससे उनकी शारीरिक शक्ति में काफी इजाफा हुआ परन्तु 30 अप्रैल 2011 को उसी अस्पताल की नर्स ने उनके नस में जहर दे दिया जिसके बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ता गया और अन्ततः 13 जून 2011 को स्वामी जी ने न्यायिक भ्रष्टाचार को हटाने, गंगा और पर्यावरण के रक्षार्थ अपनी आहुति दी। उनकी हत्या ऑरगेनो फॉसफेट जहर देकर की गई। सीबीआई ने अपराधियों से साँठ-गाँठ कर क्लोजर रिपोर्ट लगाई जिसके विरुद्ध मातृ सदन सक्षम न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी गई है और मामला विचाराधीन है। स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन मातृ सदन की त्याग की ये परम्परा अक्षुण्ण रहेगी।

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16 जून 2011 ब्रह्मलीन होने के पश्चात् मीडिया द्वारा गंगा पुत्र के नाम से अलंकृत मातृ सदन के त्यागी, तपस्वी व कर्मठ सन्त स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के पार्थिव शरीर को आश्रम परिसर में समाधि दी गई।
32 30 जुलाई से 14 अगस्त 2011 स्वामी पूर्णानन्द सरस्वती जी का अनशन जिसकी प्रमुख माँग थी गंगा पुत्र स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के हत्या की सी0बी0आई0 से जाँच। सी0बी0आई0 के केन्द्रीय प्रवक्ता श्रीमती धारिणी मिश्रा जी का डॉ वर्मा जी को एसएमएस कर जाँच लिये जाने की सूचना के बाद समाप्त। 16
33 25 नवम्बर से 05 दिसम्बर 2011 परमादरणीय श्री गुरुदेव का अनशन हरिद्वार में पूरे गंगा में खनन पूर्णरुप से प्रतिबन्धित करने हेतु। 5 दिसम्बर को शासनादेश जारी और रात्रि में अनशन समाप्त। 11
34 08 फरवरी से 08 मार्च 2012 स्वामी ज्ञानस्वरुप सानन्द जी का सत्याग्रह गंगा की मुख्य धाराओं भागीरथी, अलकनन्द और मन्दाकिनी पर निर्मित और निर्माणाधीन सभी विद्युत परियोजनाओं को निरस्त करने हेतु तपस्या। 8 मार्च को स्वामी जी तपस्या को जारी रखते हुए वाराणसी को प्रस्थान किये। 30
35 06 अगस्त से 10 सितम्बर 2012 परमादरणीय श्री गुरुदेव का अनशन पाँचसूत्रीय माँगों को लेकर जिसमें स्वामी निगमानन्द जी की हत्या की निष्पक्ष जाँच व कुम्भ क्षेत्र का विस्तार मुख्य। शासन द्वारा कुँभ मेला प्रशासनिक प्रतिवेदन 2010 के अनुसार पत्र जारी होने के पश्चात अनशन समाप्त। 36
36 10 दिसम्बर 2012 से 19 जनवरी 2013 स्वामी पूर्णानन्द सरस्वती जी अनशन गंगा के बिशनपुर व भोगपुर में बिना इआइए कराये खनन शुरू करने के विरोध में। 22 दिसम्बर को उनको बिल्कुल झूठा व निराधार आईपीसी की धारा 309, आत्महत्या के प्रयास, में गिरफ्तार किया गया। उच्च न्यायालय नैनीताल मे अवमानना याचिका डॉ0 वर्मा जी के द्वारा दाखिल। सरकार को कान्टेम्प्ट नोटिस। खनन बन्द। 19 जनवरी को स्वामी पूर्णानन्द जी जेल से जमानत पर रिहा होकर पुनः आश्रम आये और अनशन समाप्त हुआ। पुलिस ने इस केस में चार्जशीट दाखिल किया जिसे प्रवर न्यायालय में चुनौती दी गई और 11 अप्रैल 2014 को प्रवर न्यायालय ने फैसला देकर पुलिस केस को प्रथम दृष्टया ही झूठा पाया और स्वामी पूर्णानन्द जी को ससम्मान उन्मोचित किया। 41
37 22 दिसम्बर 2012 से 19 जनवरी 2013 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या शुरु, तीन-चार दिन बाद एक आहार पर, दिनांक 19 जनवरी 2013 को समाप्त 29
38 13 जून 2013 से 12 अक्तूबर 2013 स्वामी ज्ञानस्वरुप सानन्द जी दिनांक 13.06.2013 से गंगा की तीन मुख्य धाराओं भागीरथी, अलकनन्दा और मन्दाकिनी पर सभी निर्माणाधीन व प्रस्तावित बाँधों को समाप्त करने का संकल्प के साथ तपस्या शुरु की। दिनांक 01 अगस्त 2013 को पुलिस ने छल के साथ उनको बिल्कुल स्वस्थ अवस्था में ले जाकर उनके उपर 309 का मुकदमा दर्ज किया और एम्स नई दिल्ली भेजाा। दिनांक 09 अगस्त को रात के 01 बजे पुनः जिला कारागार लाया गया। 19 अगस्त 2013 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर उन्हें आजाद करने का आदेश दिया। उसके बाद वह 22 अगस्त को जेल से आजाद हुए और पुनः मातृ सदन में तपस्यारत हुए। प्रशासन, शासन और केन्द्र द्वारा उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाने के पश्चात 100 दिन के सत्याग्रह के बाद पुनः जल का त्याग। प्रशासन द्वारा 24 सितम्बर 2013 को दून अस्पताल देहरादून में भर्ती और नाक में नली लगाकर तरल पदार्थ। तत्पश्चात स्वामी जी के द्वारा वृन्दावन जाकर 12 अक्तुबर को अनशन समाप्त। 122

 

39 14 फरवरी से 14 मार्च 2014 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी गंगा में खनन के विरुद्ध और स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के मौत की पुनः जाँच के संकल्प के साथ तपस्या पर बैठे। दिनांक 09 मार्च को उत्तराखण्ड शासन ने स्वामी निगमानन्द सरस्वती जी के मौत की जाँच को विशेष जाँच दल गठन का शासनादेश जारी किया और दिनांक 14 मार्च को उत्तराखण्ड पर्यावरण प्रभाव आँकलन प्राधिकरण के द्वारा राजाजी राष्ट्रीय पार्क की सीमा के 10 किलोमीटर के अन्दर खनन बिना एनबीडब्ल्यूएल के परमिशन के नहीं हो सकता है, का आदेश जारी होने के बाद तपस्या की पूर्णाहुति की। 29
40 14 जुलाई से 27 जुलाई 2014 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी के द्वारा गंगा को बर्बाद करने वाले स्टोन क्रेशरों को सदा के लिये बन्द करने और गंगा में हमेशा के लिये खनन बन्द करने सहित अन्य माँगों को लेकर शुरु किये गये तपस्या के संकल्प को पूरा करने हेतु जिलाधिकारी ने लिखित आश्वासन दिया और तपस्या की पूर्णाहुति हुई। 14
41 27 अगस्त से 16 सितम्बर 2014 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी के द्वारा गंगा को बर्बाद करने वाले स्टोन क्रेशरों को माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड के आदेशों के अनुपालन के क्रम में जिलाधिकारी द्वारा उत्तराखण्ड शासन को पत्र लिखने के पश्चात समाप्त हुआ। 21
42 19 फरवरी से 12 मार्च 2015 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी का अनशन श्री हरीश रावत मुख्यमन्त्री उत्तराखण्ड के द्वारा सभी नियमों को ताक पर रखकर पुनः गंगा जी में खनन खोले गये खनन को बन्द करने व अन्य सम्बन्धित माँगों को लेकर। दिनांक 12 मार्च को जिलाधिकारी हरिद्वार श्री हरीश चन्द्र सेमवाल जी के द्वारा पिलरबन्दी और कुछ अन्य शर्तों के अनुपालन न होने की दशा में पट्टों का निरस्तीकरण का आदेश पारित किये जाने के बाद पुर्णाहुति एसडीएम हरिद्वार श्री वीर सिंह बुधियाल जी के हाथों हुआ। 22
43 31 मार्च से 21 अप्रैल 2015 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या अनशन कुँभ क्षत्र और पतित पावनी माँ गंगा के रक्षार्थ पाँच बिन्दुओं को लेकर। दिनांक 21 अप्रैल, अनशन के 22वें दिन जिलाधिकारी हरिद्वार ने एक पत्र जारी कर पर्यावरण मंत्रालय के रिपोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों पर आवश्यक कार्यवाही हेतु खनन निदेशक के द्वारा  आवश्यक कार्यवाही किये जाने हेतु कहा और तब खनन पर रोक लगा दी। 22
44 16 मई से 07 जून 2015 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी का अनशन हरिद्वार के जिलाधिकारी श्री हरिश चन्द्र सेमवाल जी और खनन निदेशक श्री श्रीधर बाबू अद्दांकी जी को निलम्बित करने को लेकर शुरु किया।  2 जून 2015 को अपर मुख्य सचिव श्री राकेश शर्मा जी के वार्ता के क्रम में गंगा रक्षा का संकल्प पूरा होने पर पर दिनांक 7 जून 2015 को माननीय मुख्यमन्त्री श्री हरीश रावत जी के हाथों समापन 23
45 21 मई से 07 जून 2015 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या दिनांक 22 मई से जल का भी त्याग-दिनांक 25 मई को प्रशासन द्वारा पोकलैण्ड को गंगा से बाहर निकालने के आदेश के पश्चात् इलेक्ट्राल ग्रहण- पुनः 28 मई से जल त्याग- दिनांक 30 मई को मुख्य सचिव के द्वारा पोकलैण्ड पर प्रतिबन्ध और खनन बन्द करने के आदेष पर पुनः इलेक्ट्राल ग्रहण और दिनांक 2 जून 2015 को अपर मुख्य सचिव श्री राकेश शर्मा जी का मातृ सदन आकर वार्ता में संकल्प पूर्ति की सहमति होने पर दिनांक 7 जून 2015 को माननीय मुख्यमन्त्री श्री हरीश रावत जी के हाथों समापन। 18
46 22 अक्तूबर 2015 से 23 अक्तूबर 2015 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी  की तपस्या ध्वनिप्रदूषण के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर 2
47 28 नवम्बर से 07 दिसम्बर 2015 गंगाजी में खनन के दोषी के विरुद्ध कार्रवाई और खनन सामग्री खरीदने वाले क्रेषर को सीज करने को लेकर ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी का अनशन शुरु हंआ जो 07 दिसम्बर को जिलाधिकारी हरिद्वार द्वारा खनन बन्द कर माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों सहित अन्य बिन्दुओं पर शासन को निर्णय लेने को लिखा गया। 10
48 07 दिसम्बर 2015

सुबह से शाम तक

प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी का कुम्भ मेला क्षेत्र का विस्तार प्रशासनिक प्रतिवेदन 2010 के अनुसार करने व अन्य माँगों को लेकर शुरु होते ही प्रशासन में खलबली मची और जिलाधिकारी हरिद्वार द्वारा एक पत्र कुँभ क्षेत्र के विस्तार के सम्बन्ध में सचिव नगर विकास को प्रेषित किया गया। 01
49 09 जनवरी से 19 जनवरी 2016 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या मुख्यमन्त्री जी हरीश रावत जी के द्वारा रायवाला से भोगपुर तक खनन निषिद्ध क्षेत्र की घोषित  करने की अपने वचन का उल्लंघन कर गंगाजी में बिशनपुर से भोगपुर के मध्य पुनः खनन शुरु करने के विरुद्ध रायवाला से भोगपुर तक के क्षेत्र को खनन  निषिद्ध क्षेत्र  घोषित  किये जाने और कुम्भ क्षेत्र का विस्तार भोगपुर तक करने के संकल्प के साथ शुरु। श्री हरीश रावत जी के द्वारा खनन बन्द करवाकर खनन बन्द ही रखने और अगले 10 दिनों के अन्दर वार्ता कर रायवाला से भोगपुर तक के क्षेत्र को खनन निषिद्ध क्षेत्र  घोषित करने सम्बन्धी अधिसूचना जारी कर देने के आश्वासन के बाद दिनांक  19.01.2016 को समाप्त। 11
50 15 फरवरी से 18 मार्च 2016 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द जी की तपस्या कुम्भ क्षेत्र का विस्तार कुँभ मेला प्रशासनिक प्रतिवेदन 2010 के अनुसार भोगपुर तक करने के संकल्प के साथ शुरु, दिनांक 18 मार्च को औद्योगिक विकास अनुभाग के द्वारा रायवाला से भोगपुर तक खनन बन्द रखने, दिये गये निजी नापभूमि के पट्टे निरस्त करने और इस क्षेत्र की सुरक्षा हेतु वैज्ञानिक दल गठन सम्बन्धी शासनादेश जारी होने के पश्चात समाप्त। इस बीच दिनांक 29 फरवरी को अपर जिलाधिकारी श्री जीवन सिंह नगन्याल, पुलिस अधीक्षक नगर श्री नवनीत सिंह भुल्लर, उपजिलाधिकारी श्री प्रत्यूष सिंह, पुलिस उपाधीक्षक श्री चन्द्रमोहन सिंह, थानाध्यक्ष कनखल श्री रितेश शाह का 15-20 पुलिस कर्मियों के साथ आकर उनको रात के 11 बजे बाहर से उनके कक्ष में उनकी अनुमति से सुरक्षा की दृष्टि से लगे ताला को तोड़कर अपहरण कर लिया गया और दून चिकित्सालय ले जाकर रातभर स्ट्रेचर पर संक्रामक रोगियों के बीच पूरी रात बैठकर काटने को मजबूर किया गया और अगले दिन यानि 01 मार्च को दिन के तीन बजे तक ऋषिकेश एम्स लाये जाने से पहले दोपहर तीन बजे तक पीने के लिये कौन कहे कुल्ला करने और मुँह धोने तक के लिये भी पानी नहीं दिया गया और साथ में मानसिक यातना भी दी गई। 02 मार्च 2016 को समाचारपत्रों में उनके एम्स में होने की खबर के बाद मातृ सदन द्वारा उनको पुनः मातृ सदन आश्रम लाया गया। उनकी तपस्या जारी रही जिसकी पूर्णाहुति संकल्प पूर्ति के बाद 18 मार्च को हुई। 32
51 29 फरवरी से 18 मार्च 2016 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या कुम्भ क्षेत्र को विस्तार कुँभ मेला प्रशासनिक प्रतिवेदन 2010 के अनुसार भोगपुर तक करने के संकल्प के साथ शुरु, दिनांक 18 मार्च को औद्योगिक विकास अनुभाग के द्वारा रायवाला से भोगपुर तक खनन बन्द रखने, दिये गये निजी नापभूमि के पट्टे निरस्त करने और इस क्षेत्र की सुरक्षा हेतु वैज्ञानिक दल गठन सहित जिलाधिकारी हरिद्वार को कुम्भ मेला क्षेत्र के विस्तार हेतु प्रस्ताव बनाकर भेजने सम्बन्धी शासनादेश जारी होने के पश्चात समाप्त। इस बीच 07 मार्च 2016 को महाशिवरात्रि के दिन उपजिलाधिकारी हरिद्वार श्री प्रत्यूष सिंह अपने साथ थानाध्यक्ष कनखल श्री रितेश शाह और 15-20 पुलिसकर्मियों लेकर मातृ सदन के मुख्यद्वार का ताला तोड़ने सहित प्रातः वन्दनीयश्री गुरुदेव जी के पवित्र पूजा गृह का ग्रिल और मुख्य दरवाजे  से पहले लगी जाली को कटर से काटा और मुख्य दरवाजे को भी काफी नुकसान पहुचाकर प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या में विघ्न डाला। 18 मार्च 2016 को अपर सचिव खनन के द्वारा शासनादेश जारी कर गंगाजी में रायवाला से भोगपुर तक खनन प्रतिबन्धित करने और समस्त निजी पट्टों को  निरस्त करने और एक वैज्ञानिक दल का गठन कर इस के सुरक्षार्थ उपाय किये जाने हेतु शासनादेश जारी होने पर पुर्णाहुति की गई। 19
52 05 नवम्बर से 27 नवम्बर 2016 अवैध खनन के विरुद्ध ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द की तपस्या। प्रशासन की अनदेखी। श्री गुरुदेव जी का संयम तप में प्रवेश। 23
53 27 नवम्बर से 06 दिसम्बर 2016 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी का संयम तप में  प्रवेश।  2 दिसम्बर से जल त्याग, 06 दिसम्बर 2016 को सीपीसीबी का निर्देश, 07 दिसम्बर को तपस्या की पूर्णाहुति। 10
54 14 मई से 24 मई 2017 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द का माननीय उच्च नयायालय के आदेश के अनुपालन हेतु। प्रशासन-शासन की अनदेखी। 11
55 24 मई से 05 जून 2017 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या माननीय उच्च नयायालआदेश के अनुपालन हेतु। शासन- प्रशासन की अनदेखी। दिनांक 28-29 मई की रात भारी पुलिस बल के साथ आक्रमण, दम घोंटकर जान से मारने का प्रयास, 05 मई 2017 को गंगा मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा कार्रवाई हेतु कड़ा लिखित निर्देश के बाद तपस्या की पूर्णाहुति। 13
56 30 अक्तूबर से 15 दिसम्बर 2017 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द की तपस्या शुरु। 07 दिसम्बर 2017 को प्रशासन द्वारा जबरन उठाकर दून अस्पताल में जहर देकर मारने की कोशिश, तत्पश्चात 9 जनवरी एम्स ऋषिकेश और वहाँ यातना देकर मारने की कोशिश, मातृ सदन द्वारा फिर वापस आश्रम 15 दिसम्बर को लाकर तपस्या स्थगित। 47
57 16 दिसम्बर 2017 से 13 जनवरी 2018 प्रातः वन्दनीय श्री गुरुदेव जी की तपस्या शुरु। 29 दिसम्बर 2017 को धारा 144 लागू, माननीय जिला न्यायालय में 02 जनवरी को स्थगन 29
58 22 जून 2018 से 11 अक्तूबर 2018 स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द जी पूर्वाश्रम प्रोफेसर जी.डी.अग्रवाल 22 जून 2018 से प्रारम्भ, 10 जुलाई 2018 को प्रशासन द्वारा जबरन उठाकर मारने का प्रयास, माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में पिटीशन दाखिल, आदेश होने के बाद जान बच पाई, 23 जुलाई 2018 को पुनः मातृ सदन आना, 13 अगस्त को प्रशासन के अनुरोध पर एसिडिटी के ईलाज हेतु एम्स ऋषिकेश, पुनः मातृ सदन 21 अगस्त को, उपवासी लगातार जारी, 02 अगस्त को मुख्य सचिव उत्तराखण्ड ने स्काईप के माध्यम से लैपटॉप पर स्वामी जी से बात की, 03 अगस्त की रात को केन्द्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती जी ने मातृ सदन आकर उनसे बात कर फोन पर केन्द्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से बात करवाई, 10 अक्तूबर को नियम विरुद्ध धारा 144 लगाकर पुलिस प्रशासन द्वारा जबरन उठाना, 11 अक्तूबर 2018 को एम्स ऋषिकेश में हत्या।

 

मांगे

पहली, गंगा-महासभा द्वारा प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरन्त संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराया जाए. इस ड्राफ्ट के प्रस्तावकों में स्वामी सानंद खुद भी थे. यदि ऐसा न हो सके तो इस ड्राफ्ट के अध्याय–1 (धारा 1 से धारा 9) को राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा तुरंत लागू और प्रभावी बनाया जाए.

दूसरी मांग , अलकनन्दा, धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडर तथा मंदाकिनी पर प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना निरस्त की जाए.

गंगा की सहायक नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं को निरस्त किया जाए. हरिद्वार में खनन पर पूर्ण रोक लागू हो, यह तीसरी मांग थी.

चौथी मांग ‘गंगा भक्त परिषद‘ का गठन है.

 

111 दिन का अनशन       
59 24 अक्तूबर  2018 से

04 मई 2019

ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द की तपस्या स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद जी की संकल्पों की पूर्ति हेतु प्रारम्भ। 29 नवम्बर 2018 को सीआरपीसी धारा 144 लगाकर गुण्डागर्दी करते हुए मनीष कुमार एसडीएम व अन्यों द्वारा उठाकर जबरन एम्स ऋशिकेष मं भर्ती कराना, वहाँ कुछ अवाँछित पदार्थ दिया जाना, मारने की कोशिश, 01 दिसम्बर 2018 को लामा भरकर मातृ सदन आकर तपस्या जारी. 04 मई को एनएमसीजी के निदेशक श्री राजीव  रंजन मिश्रा जी का लिखित आश्वासन  के बाद अनशन विराम।

 

मांगे वही जो सानंद जी की थी

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60 15 दिसम्बर  2019 से मार्च 2020 ब्रह्मचारिणी पद्मावती की तपस्या, माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संज्ञान में केन्द्रीय सरकार नई दिल्ली का एनएमसीजी के निदेशक के द्वारा पहल कर ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द की तपस्या को समाप्त कराने लिये दिये गये लिखित व मौखिक आश्वासनों की पूर्ति नहीं होने पर शुरु हुआ। प्रमुख माँगें वही जो स्वामी सानंद जी के बाद ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द के द्वारा आगे बढ़ाया गया था। अनशन के 46वें दिवस को रात में उनके कमरे का दरवाज़ा तोड़कर स्वस्थ हालत में जबरन उनको दून अस्पताल में ले जाया गया, उनके ऊपर गर्भवती होने का झूठा दोष लगाया वहां से से लौटने के बाद से उनका स्वास्थ्य गिरता गया और कोमा की स्थिति में  उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती किया जहाँ वो एक महीने तक आईसीयू में रहीं.

आज डेढ़ साल बाद भी वो नार्मल अवस्था में नहीं है, व्हील चेयर पर हैं और अपने दैनिक कार्यों को करने में अक्षम हैं|

मांगे

1.       गंगा जी पर प्रस्ताववित और निर्माणाधीन  समस्त बांधों को निरस्त किया जाए विशेषकर सिंगोली भटवारी, फाटा ब्युंग, तपोवन विष्णुगाड, विष्णुगाड पीपलकोटी को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए |

2.       बने हुए बांधो से IIT Consortium के recommendation के अनुसार eflow दिया  जाए और ये नियम हरिद्वार   के भीमगोड़ा और नरोरा आदि बांधो पर भी हो लागू हो|

3.       गंगा पर खनन सम्बन्धी  NMCG के आदेश का अक्षरशः पालन  किया जाए और इसके लिए नोटिफिकेशन जारी हो ताकि  भ्रष्ट नेता और अधिकारी कालांतर में इसके साथ छेडछाड न कर सकें |

4.       गंगा के एक्ट के लिए एक विस्तृत चर्चा हो जिसमे मातृ सदन एवं अन्य  गंगा समर्पित  संस्था भी सम्मिलित रहें उसके बाद ही इसे पार्लियामेंट में भेजा जाए|

5.       NGT के जज श्री राघवेन्द्र राठोर जी जो गंगा द्रोही  के रूप में परिलक्षित हो रहे हैं, को तात्कालिक  प्रभाव से निलंबित किया  जाये और इस सम्बन्ध  में मातृ सदन के द्वारा प्रेषित  समस्त पत्रों को संज्ञान में लेते हुए एक उच्च स्तरीय जांच बैठे|

6.       हरिद्वार  के एस एस पी श्री सेंधथिल अबुदई राज मातृ सदन के परम पूज्य श्रधेय श्री गुरुदेव स्वामी शिवानन्द  जी को मरवाने के लिए मैदान में उतर गए हैं इन्हें कुछ उच्च राजनेता, माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों का सरंक्षण प्राप्त है| इन्हें  तत्काल निलंबित किया जाए एवं इन पर उच्च स्तरीय जांच बैठाया जाये|

61 30 जनवरी 2020 से 10 मार्च 2020 ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद साध्वी पद्मावती के अस्पताल जाने के तुरंत बाद 30 जनवरी 2020 से अनशन पर बैठे

साध्वी पद्मावती की मांगों को लेकर और आश्रम की सिक्यूरिटी हटाने के विरोध मैं

19 फ़रवरी 2020 से जल भी त्याग दिया

उसके पश्चात् 10 मार्च 2020 को  श्री गुरुदेव स्वामी शिवानन्द जी ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन को विराम दिलाया और स्वयं तपस्या पर बैठ  गए

62 10 मार्च 2020 से 29 मार्च 2020 गुरुदेव स्वामी शिवानन्द जी महराज  ने दिनांक 10 मार्च 2020 से तपस्या शुरू की किन्तु कोरोना महामारी के चलते 29 मार्च को स्थगित कर दी

1.   स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद जी के समय से चली आ रही मांग – गंगाजी एवं गंगाजी की सहायक नदियों पर उत्तराखण्ड में प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन समस्त जल विद्युत परियोजनाओं को निरस्त करना।

2.   हरिद्वार में गंगाजी एवं सहायक नदियों में खनन पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाना और गंगाजी से 05 किलोमीटर की दूरी के अन्दर संचालित समस्त स्टोन क्रेशरों को हटाना/तत्काल बन्द करना तथा इस आशय की अधिसूचना केन्द्र सरकार द्वारा जारी करना।

3.   एनएमसीजी का आदेश दिनांकित 09 अक्तूबर 2018 और इस आदेश को अन्तिम रूप देकर प्रधानमन्त्री को दिनांक 0। अक्तूबर 2019 को सूचित करने के बाद जिन व्यक्तियों के द्वारा इसके विपरीत कार्य किया गया उनके क्रियाकलापों पर एक उच्च स्तरीय जाँच बैठे।

4.   गंगाजी के लिये सानंद जी के द्वारा प्रस्तावित एक्ट लागू किया जाये और गंगा भक्त परिषद नामक एक स्वायत संस्था बने जिसमें गंगाजी के प्रति समर्पित व्यक्ति ही रहें। यह इसलिये भी आवश्यक हो गया है क्‍योंकि श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी ने प्रधानमन्त्री को दरकिनार कर गुप्त तरीके से क्रियान्वित मांग को निरस्त कर दिया है।

5.   स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद जी को पूर्ण चेतन, स्वस्थ एवं संघर्षशील अवस्था में मातृ सदन से बलात अपहरण कर एम्स ऋषिकेश ले जाकर की गई हत्या और उनकी माँगों को लेकर तपस्या पर बैटे ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द को भी उन्हीं की भांति बलात अपहरण कर उसी एम्स ऋषिकेश ले जाकर विष देकर हत्या का प्रयास तथा उसके बाद तपस्या पर बैठी साध्वी पद्मावती को रात के 11 बजे कमरे का दरवाजा तोड़कर अपहरण करना, रात में ही रेप करने की चेष्टा करना, कलंकित करने की चेष्टा करना और असफल होने पर अन्त में खतरनाक जहर देकर हत्या की चेष्टा करना (जिसका प्रभाव अभी तक बना हुआ है) और तत्पश्चात तपस्या पर बैठे ब्रह्मचारी आत्म्बोधानन्द को आश्रम से उठाकर दिल्ली एम्स में लावारिस अवस्था में छोडना सहित श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शासन तथा प्रशासन के द्वारा कारित अनेकानेक गैरसंवैधानिक कृत्यों की उच्चस्तरीय जाँच।

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63 3 अगस्त 2020 से 3 सितम्बर 2020 कोरोना के बाद श्री गुरुदेव की  3 अगस्त से 3 सितम्बर 20 से पुनः तपस्या शुरू

 

निम्नलिखित मांगों को लेकर 03 अगस्त 2020 से मातृ सदन संस्थापक स्वामी श्री शिवानन्द जी महाराज कोविड-19 की वजह से 29 मार्च 2020 को विराम दिये गये तपस्या को निम्नलिखित माँगों के साथ पुनः प्रारम्भ करेंगे। उल्लेखनीय है कि मातृ सदन ने कोविड-19 के कारण तपस्या को विराम दिया था लेकिन खनन और स्टोन क्रेशर माफिया के सबसे बड़े पैरोकार, गंगा-द्रोही, धर्म द्रोही श्री त्रिवेद्र सिंह रावत, मुख्यमन्त्री उत्तराखण्ड ने संत द्रोही और गंगा के लिये अभिशाप स्वरूप श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से मिलकर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अपेक्षा के अनुसार जिन मांगों को लिखित में पूर्ति कर उसकी सूचना प्रधानमन्त्री को दिये जाने के बाद उल्लंघन कर समस्त मापदण्डों को दरकिनार कर गंगाजी का दोहन लॉकडाउन अवधि में किया गया। इसलिये तत्काल प्रभाव से तपस्या प्रारम्भ करना आवश्यक हो गया।

 

मार्च 2020 सत्याग्रह की मांगे पूर्वव्रत ज़ारी.

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64 23 फरवरी 2021 से 31 मार्च 2021 आत्मबोधानंद 23 फ़रवरी 2021 से 31 मार्च 2021 37
65 13 मार्च 2021 से 1 अप्रैल 2021 श्री गुरुदेव स्वामी शिवानन्द जी  13 मार्च 2021 से 1 अप्रैल 2021 20
66 18 अगस्त 2021 से 1 अक्तूबर 2021 ब्रह्मचारी आत्मबोधानन्द  दिनांक 18 अगस्त 2021 से शुरु किया| 28 सितम्बर से जल त्याग किया, तब 30 सितम्बर को जिलाधिकारी ने वार्ता की और जिलाधिकारी हरिद्वार ने समस्त मांगे मानते हुए जूस पिलाकर 1 अक्तूबर 2021 को  अनशन समाप्त कराया 45